सिल्क रूट से पीस रूट तक: क्या कैलाश यात्रा और नाथुला ट्रेड बदलेंगे भारत-चीन रिश्ते?

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  • प्रकाशित: अगस्त 03, 2026

भारत और चीन इन दिनों कूटनीति का एक नया रास्ता अपना रहे हैं- व्यापार से भरोसा बनाना.करीब 6 साल बाद सिक्किम के नाथुला दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू हो गया है. पहली नजर में ये सिर्फ बिजनेस की खबर है, लेकिन इसका भू-राजनीतिक मतलब बहुत बड़ा है. नाथुला कभी पुराने सिल्क रूट का हिस्सा था. केंद्र सरकार ने यहां ऑल-वेदर रोड और बुनियादी ढांचा बनाया है ताकि बॉर्डर ट्रेड के साथ सेना की लॉजिस्टिक भी मजबूत हो. इससे ठीक पहले कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल हुई थी. एक्सपर्ट मानते हैं कि ये दोनों घटनाएं "ट्रस्ट बिल्डिंग" और "पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट" का हिस्सा हैं. साल 2020 के गलवान संघर्ष के बाद एलएसी पर तनाव और अविश्वास अब भी है, हजारों सैनिक तैनात हैं. लेकिन इसके बावजूद बातचीत जारी है. अक्टूबर 2024 में डेप्सांग-डेमचोक से सैनिकों की वापसी और कजान में पीएम मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद रिश्तों में तेजी आई.

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