कभी-कभी जिंदगी एक सेकंड में ऐसा इम्तिहान ले लेती है जिसे देखकर पत्थर दिल इंसान भी कांप उठता है. जिस घर में कल तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, जहां दावत की तैयारियां चल रही थीं, आज वहां सिर्फ चीखें, सन्नाटा और अपनों की तलाश में रोती आंखें हैं. बिहार के वैशाली से आई इस खबर ने हर किसी का कलेजा चीर दिया. कैसे एक छोटी सी भूल ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया. मंगलवार की वो शाम वैशाली के राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव के पास सब कुछ सामान्य था. गंगा नदी के उस पार एक भोज का कार्यक्रम था.
गांव के कुछ लोग और ढेर सारे मासूम बच्चे सज-धज कर नाव पर सवार हुए थे. नाव पर करीब 15 से 20 लोग बैठे थे. बच्चों के चेहरे पर दावत में जाने की खुशी और चमक थी. किसी को क्या पता था गंगा की लहरें उनके लिए काल बन जाएंगी.जैसे ही नाव नदी के बीचोंबीच पहुंची अचानक वो भयानक हादसा हो गया. पलक झपकते ही नाव गंगा की तेज धाराओं में पलट गई. एक पल में सब खत्म, संभलने, बचाने के लिए पुकारने तक का मौका नहीं मिला, सब पानी में समा गए. जब तक स्थानीय लोग और प्रशासन मदद के लिए पहुंचते बहुत देर हो चुकी थी. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 11 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है जिनमें छोटे-छोटे बच्चे शामिल हैं. सोचिए उन मां-बाप पर क्या बीत रही होगी जिन्होंने जिगर के टुकड़ों को सुबह हंसते भेजा और शाम को बेजान लाश मिली. अस्पताल के बाहर चीखें, शवों से लिपटकर रोते बिलखते परिवार, रूह कांप जाने वाला मंजर.