हरियाणा में पाकिस्तान से भारत आने के बाद उन्होंने पूरी उम्र इस उम्मीद में गुजार दी कि एक दिन उन्हें उनका हक मिलेगा, लेकिन उम्र के इस आखिरी पड़ाव में भी उनकी पेंशन का मामला अटका हुआ है.