सत्य निकेतन हादसे के बाद डर का माहौल है। बच्चे बहुत डरे हुए हैं, फैमिली डरी है, मां-बाप पूछ रहे हैं - तुम्हारी बिल्डिंग में पिलर है क्या? कल तक जिन गलियों में सपने लेकर आए थे, आज वहीं से सूटकेस, बैग और चादर में सामान लपेटकर निकल रहे हैं। किसी को लेने माता-पिता दिल्ली पहुंचे हैं, किसी के रिश्तेदार आए हैं। छात्र कह रहे हैं - Please haunts us now, I would never come back to this place. 5-5 फ्लोर वाले सभी PG को खाली करने को कहा गया है क्योंकि MCD उन्हें सील और डिमोलिश करने वाली है. लेकिन जाने की जगह नहीं है. दीवारों पर क्रैक आने पर भी किसी ने नहीं सोचा था इतना भयानक होगा. अब हर कोई पूछ रहा है - बिल्डिंग कितनी पुरानी है? पिलर है या नहीं? इन खाली होती गलियों से सिर्फ सामान नहीं, भरोसा निकल रहा है. जो शहर भविष्य बनाने आए थे, वहां सुरक्षित छत तक नहीं है. गार्जियन फोन कर वापस बुला रहे हैं - पढ़ाई बाद में, पहले जान बचाओ.