सीमांचल की सर्द सुबहों में जब कुहासा चारों ओर फैला हो और हर नुक्कड़ पर किसी ठेले से उठती भाप लोगों को अपनी ओर खींच रही हो, तो समझ लीजिए कि वहां ‘भक्का’ तैयार हो रहा है. चावल के आटे और गुड़ से बना यह पारंपरिक व्यंजन न सिर्फ बुजुर्गों की पसंद है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी भी इसे उतना ही पसंद करती है. इडली जैसी शक्ल और स्वाद के कारण इसे सीमांचल का ‘इडली’ कहा जाता है. धान की नई फसल के आगमन का प्रतीक यह व्यंजन सर्दियों में हर किसी के दिल और स्वाद को गर्माहट देता है.