उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पिछले 15-20 दिनों से सड़कों पर आंदोलन जारी है. विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की मांग है कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस हत्याकांड में वीवीआईपी कौन था.
अंकिता की मां सोनी भंडारी ने कहा, “औलाद से बढ़कर कुछ नहीं होता. अब हम अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं. इसमें हमारी जान भी चली जाए तो हमें कोई गम नहीं.” उन्होंने बताया कि जब अंकिता छोटी थी, तब परिवार गरीबी से जूझ रहा था. “उसका बचपन भी कष्ट में निकला. छोटी-छोटी चीजों के लिए मेरे बच्चे तरसे. जब उसकी खुशी के दिन आने थे, तब वो चली गई.”
बुधवार, 7 जनवरी को देर शाम अंकिता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की और अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाई. परिवार का कहना है कि दोषियों को सख्त सजा मिले और मामले में किसी भी वीवीआईपी की भूमिका उजागर हो.
क्या है मामला?
पौड़ी जिले के यमकेश्वर में स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी. रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर यह वारदात अंजाम दी. पुलकित आर्य एक भाजपा नेता का बेटा है. हाल ही में स्थानीय अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है.
वीवीआईपी एंगल पर सवाल
इस मामले में वीवीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि उर्मिला सनावर, जो खुद को भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ की पत्नी बताती हैं, ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो और ऑडियो पोस्ट किया था. इसके बाद सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई है.