देहरादून को जलभराव से बचाने की तैयारी, मानसून से पहले 9 बड़े नालों से निकाला लगभग 8000 टन कचरा

मॉनसून में देहरादून में हर साल जलभराव की समस्या रहती है. बारिश का पानी नालों की जगह सड़कों पर बहता है. स्मार्ट सिटी की पोल खुल जाती है. इसी से बचने के लिए नगर निगम ने मार्च से विशेष सफाई अभियान चलाया.

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मॉनसून सीजन आने से पहले देहरादून नगर निगम ने एक बड़ा सफाई अभियान शुरू किया है. इस सफाई अभियान का मकसद देहरादून शहर और उसके आसपास के क्षेत्र में मानसून सीजन में होने वाली बारिश से जल भराव ना हो, इसके लिए यह सफाई अभियान चलाया गया. देहरादून नगर निगम के इस विशेष सफाई अभियान में शहर के प्रमुख 9 बड़े नालों की सफाई की जा रही है. इसके अलावा शहर 54 ऐसी जगह हैं, जहां पर बड़े पैमाने पर कूड़ा कचरा इकट्ठा होता है. उन जगहों की भी सफाई अभियान शुरू किया गया है. नगर निगम ने अब तक यानी मार्च के महीने से शुरू इस सफाई अभियान में 8000 मेट्रिक टन कूड़ा कचरा इकट्ठा किया है.

भले ही देहरादून उत्तराखंड की राजधानी है और इसे देश की 100 स्मार्ट सिटी में भी देहरादून का नाम आया था और इसे इस तरह विकसित किया गया, लेकिन मानसून सीजन में होने वाली बारिश हर बार उसे स्मार्ट सिटी की पोल खोल देती है, क्योंकि शहर में कोई ऐसा कोना नहीं रहता जहां पर जल भराव नहीं होता. बारिश का पानी नलों में काम और सड़कों पर बहता हुआ ज्यादा दिखता है. यही वजह है कि नगर निगम शहर के प्रमुख 9 नालों की सफाई कर रहा है और इसके अलावा 54 जगह पर सफाई अभियान शुरू किया गया है.

नगर निगम ने अब तक 8000 मीट्रिक टन कूड़ा कचरा और अन्य मालवा इकट्ठा किया है. नगर निगम ने मानसून से पहल सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई का दावा किया है. और कहा कि उनका इस विशेष सफाई अभियान का मकसद शहर में पानी की निकासी व्यवस्था को ठीक करना और नदियों को पुनर्जीवित करना है.

सफई के दौरान ठोस अपशिष्ट, प्लास्टिक और अन्य अवरोधक सामग्री को हटाया गया है, इस बड़े अभियान को अंजाम देने के लिए छह जेसीबी मशीनें, सात डंपर और नौ ट्रैक्टर-ट्रालियों को लगाया गया है, जो कचरे के निस्तारण में जुटे हैं. विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है, जहां पहले जलभराव की समस्या अधिक रही है.

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देहरादून शहर के प्रमुख 9 नालों की सफाई अभियान में 8000 मीट्रिक टन कूड़ा कचरा और अन्य मालवा निकल  गया, जिसमें सत्तोवाली घाटी (बिंदल नदी) जिसका सफाई अभियान 8 मार्च से शुरू किया गया और 22 मार्च तक रहा.

  • ऊर्जा पार्क (इंद्रेश हॉस्पिटल रिस्पना नदी)  8 मार्च से 16 मार्च तक सफाई की गई
  • आजाद कॉलोनी रिस्पना नदी पर 11 मार्च से 13 मार्च तक सफाई अभियान
  • गांधीग्राम रिस्पना नदी पर 23 मार्च से 28 मार्च तक
  • चूना भट्टा रिस्पना नदी पर 2 अप्रैल से 17 अप्रैल तक
  • ब्राह्मण वाला करगी रिस्पना नदी पर 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक सफाई अभियान
  • त्रिमूर्ति विहार टर्मिनल रोड रिस्पना नदी पर 10 अप्रैल से 17 अप्रैल तक
  • लालपुल बिंदल नदी पर 29 मार्च से 1 मई तक
  • इंद्रेश नगर बिंदल नदी 18 अप्रैल से 2 मई तक

देहरादून नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त राजवीर सिंह ने बताया कि यह विशेष सफाई अभियान इसलिए चलाया जा रहा है, ताकि नदियों की सफाई हो सके और शहर में जल भराव ना हो. सहायक नगर आयुक्त राजवीर सिंह कहते हैं कि पिछले वर्ष 25000 मेट्रिक टन कूड़ा कचरा और मालवा इकट्ठा किया गया था. उन्होंने बताया कि प्रमुख नालों के लिए सफाई अभियान इसलिए चलाया गया, क्योंकि ज्यादातर मसूरी या फिर ऊपर पहाड़ों से भारी मात्रा में कचरा और सिल्ट आता है, जिसको साफ करना जरूरी है. इसके अलावा शहर में जल भराव ना हो इसके लिए भी इन नौ प्रमुख नालों में सफाई अभियान चलाया गया. 

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वहीं, देहरादून में पर्यावरण संरक्षण और बड़े पैमाने पर सफाई अभियान करने वाली इको ग्रुप सोसाइटी के अध्यक्ष आशीष गर्ग का कहना है कि पहले भी रिस्पनाह नदी में उनकी समिति ने सफाई अभियान चलाया था और 4 महीने में 600 टन कूड़ा कचरा जिसमें प्लास्टिक और अन्य तरह का कचरा शामिल था, उसे निकाला था.

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