- हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में चार हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाकर उनकी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी
- कॉलर से हाथियों के कुंभ क्षेत्र की ओर बढ़ने की जानकारी मिलने पर उन्हें जंगल की ओर डायवर्ट किया जाएगा
- वन विभाग ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और WWF के सहयोग से वॉच टावर, सोलर फेंसिंग की योजना बनाई है
अर्धकुंभ 2027 से पहले हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग चार हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाएगा. इससे हाथियों की रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग होगी और उनके रिहायशी इलाकों या कुंभ क्षेत्र की ओर बढ़ते ही उन्हें जंगल की ओर डायवर्ट किया जा सकेगा, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं और वन्यजीव, दोनों की सुरक्षा का ख्याल रखा जा सकें.
वन विभाग की कार्ययोजना, हाथियों पर रेडियो कॉलर
हरिद्वार डिविजन में वन विभाग ने चार हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाने का निर्णय लिया है. इसका उद्देश्य हाथियों की रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग करना है, वे किस दिशा में जा रहे हैं, क्या वे रिहायशी इलाकों या कुंभ क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं. इन सबकी जानकारी लगातार ट्रैक की जाएगी. मूवमेंट का पता लगते ही हाथियों को जंगल में ही डायवर्ट किया जाएगा, ताकि कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की ओर उनका रुख न हो.
ये भी पढ़ें : बेटे ने नहीं बताया, वीडियो में पिटते देखा... रुद्रपुर में मुस्लिम शख्स की मां ने कही दिल चीर देने वाली बात
संस्थागत सहयोग और मैदानी बंदोबस्त
इस कार्य में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और WWF जैसी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा. कुंभ क्षेत्र के आसपास जहां-जहां जंगल नजदीक है, वहां वॉच टावर लगाए जाएंगे. साथ ही कैमरा ट्रैप लगाने पर भी विचार हो रहा है. कुंभ क्षेत्र के पास के जंगलों में सोलर फेंसिंग की योजना है. आयोजन अवधि में वन विभाग के कर्मचारी 24×7 तैनात रहेंगे और क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) का गठन किया जाएगा.
ये भी पढ़ें : यह रोड मुसलमान के लिए नहीं... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर ये किसने लिखा? NDTV पड़ताल में पूरी कहानी
मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने का प्लान
कुंभ आयोजन के दौरान मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए एक समग्र योजना तैयार की गई है. हाल में आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों की बार‑बार सक्रियता देखी गई है. रेडियो कॉलर लगने के बाद रीयल‑टाइम निगरानी संभव होगी. हरिद्वार डिविजन उन हाथियों पर कॉलर लगाएगा जो झुंड के टीम‑लीडर होते हैं, यह मादा भी हो सकती है और नर भी. साथ ही, झुंड से अलग चलने वाले ‘टस्कर' हाथियों पर भी कॉलर लगाया जाएगा.
भौगोलिक स्थिति, कॉरिडोर और बफर की चुनौती
राजाजी टाइगर रिजर्व में 500 से अधिक हाथी हैं, पर हरिद्वार शहर और राजाजी टाइगर रिज़र्व के बीच बफर जोन नहीं है. यही कारण है कि वन्यजीव सीधे आबादी क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं. हरिद्वार में मोतीचूर से टिबड़ी, भेल क्षेत्र, रोशनाबाद, बैरंगी कैंप, जगजीतपुर, मिसरपुर, गाडोवाली, कटारपुर और बदरपुर जाट क्षेत्रों तक हाथियों का पारंपरिक कॉरिडोर फैला है. श्यामपुर से जगजीतपुर, मिसरपुर, गाडोवाली, कटारपुर तक तो लगभग रोज हाथियों की आवाजाही दर्ज होती है.














