Adi kailash yatra 2026 Date: उत्तराखंड में एक मई से प्रस्तावित आदि कैलाश यात्रा शुरू होने से पहले ही नियमों की अनदेखी का बड़ा मामला सामने आया है. दरअसल, बिना इनर लाइन परमिट यानी ILP के श्रद्धालुओं के संवेदनशील क्षेत्र में पहुंचने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
आदि कैलाश यात्रा के लिए प्रशासन ने एक मई से आधिकारिक यात्रा की शुरुआत की तारीख तय की है, लेकिन इससे पहले ही कुछ स्थानीय टूर ऑपरेटर नियमों को दरकिनार कर श्रद्धालुओं को यात्रा पर ले जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, बिना प्रशासनिक अनुमति और बिना इनर लाइन परमिट के ही यात्रियों को सीमांत क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है.
समय से पहले श्रद्धालुओं को पहुंचा रहे हैं टूर ऑपरेटर
नियमों के अनुसार, आदि कैलाश यात्रा के लिए ILP अनिवार्य होता है और बिना इसके किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाती है. इसके बावजूद यात्रियों का वहां पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक के तौर पर देखा जा रहा है. सबसे अहम बात यह है कि अब तक प्रशासन ने ILP जारी करने की स्पष्ट तारीख भी घोषित नहीं की है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.
सुरक्षा के लिहाज से भी है बहुत खतरनाक
इस पूरे मामले पर स्थानीय निवासी दीपेश नेगी गंभीर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि अगर इसी तरह बिना परमिट के लोग जाते रहेंगे, तो यह सुरक्षा के लिहाज से बहुत गंभीर मामला साबित हो सकता है. लिहाजा, प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और ऐसे टूर ऑपरेटरों पर सख्ती करनी चाहिए. दरअसल, भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित आदि कैलाश क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है. ऐसे में बिना अनुमति लोगों का वहां पहुंचना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है.
आईटीबीपी को जांच के निर्देश
वहीं, उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि इस मामले पर पर आईटीबीपी को जांच के निर्देश दे दिए गए हैं. उपरोक्त वीडियो को संज्ञान में लेकर मामले की जांच की जा रही है.
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अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं.
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