लखीमपुर खीरी में बनेगा जिम कॉर्बेट जैसा पार्क, CM योगी का ये है प्लान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'सस्टेनेबल टूरिज्म' विजन को धरातल पर उतारते हुए, लखीमपुर खीरी जिले की महेशपुर वन रेंज को उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट की तर्ज पर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है.

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उत्तर प्रदेश अब केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म के ग्लोबल हब के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'सस्टेनेबल टूरिज्म' विजन को धरातल पर उतारते हुए, लखीमपुर खीरी जिले की महेशपुर वन रेंज को उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट की तर्ज पर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. यूपी ईको टूरिज्म विकास बोर्ड द्वारा 2.5 करोड़ रुपये की लागत से इस क्षेत्र का कायाकल्प किया जा रहा है, जो न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई संजीवनी देगा.

दुधवा के बफर क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं का संगम

दुधवा नेशनल पार्क के बफर जोन में स्थित महेशपुर वन रेंज को एक पूर्ण ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है. यहां पर्यटकों के लिए भव्य प्रवेश द्वार, लग्जरी कॉटेज ब्लॉक, इंटरलॉकिंग पाथवे और आरामदायक बेंच होंगी. 3D म्यूरल (दीवार चित्र), सेल्फी पॉइंट्स, लाइफ-साइज एनिमल फिगरिन और बच्चों के लिए विशेष प्ले-एरिया होगा. पर्यटकों के बैठने के लिए ट्री-सीटिंग और गजेबो (गोल हट) का निर्माण होगा.

पर्यावरण संरक्षण के साथ 'स्मार्ट' विकास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन में पर्यटन और पर्यावरण का संतुलन सर्वोपरि है. इसी को देखते हुए महेशपुर रेंज में इको-फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. पूरे क्षेत्र को सौर ऊर्जा से रोशन किया जाएगा. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और आधुनिक सबमर्सिबल सिस्टम होगा. पर्यटकों के मार्गदर्शन के लिए पर्यावरण के अनुकूल सूचना बोर्ड होंगे.

365 दिन पर्यटन: बारिश में भी ले सकेंगे प्रकृति का आनंद

अमूमन नेशनल पार्क सफारी सीजन के बाद बंद हो जाते हैं, लेकिन महेशपुर रेंज के विकास से अब पर्यटक बारिश के मौसम में भी प्रकृति का लुत्फ उठा सकेंगे. यूपी ईको टूरिज्म बोर्ड यहां पहले से ही चंदन चौकी क्षेत्र में ईको-लॉज और कैंपिंग साइट्स संचालित कर रहा है, जिससे यह क्षेत्र साल भर पर्यटकों की पसंद बना रहेगा.

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स्थानीय रोजगार और थारू संस्कृति को बढ़ावा

यह परियोजना केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का जरिया भी है. जनजातीय समुदाय के युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है. पर्यटकों को थारू जनजाति के पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों का अनुभव मिलेगा. शारदा बैराज और दुधवा नेशनल पार्क में इंटरप्रिटेशन सेंटर का अपग्रेडेशन भी इसी कड़ी का हिस्सा है.
 

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