UP SIR Draft List: रामपुर से बरेली तक मुस्लिम बहुल सीटों पर वोटर्स की सख्या में बड़ी कटौती, क्या बदलेगा समीकरण

2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर देखें तो इन जिलों में ज्यादातर सीटों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवारों की जीत हुई थी. अब सवाल यह है कि पहले ड्राफ्ट के बाद इन इलाकों में वोटरों की संख्या में कितना बदलाव आया है.

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  • UP के मुस्लिम बहुल जिलों में SIR प्रक्रिया के पहले ड्राफ्ट के बाद वोटरों के नामों में भारी कटौती हुई है
  • रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा और पूर्वांचल के बलरामपुर जैसे जिलों में भी वोट कटे हैं
  • बलरामपुर जिले में सबसे ज्यादा लगभग चौबीस प्रतिशत वोटरों के नाम हटाए गए जो अन्य जिलों से कहीं अधिक हैं
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लखनऊ:

बिहार में SIR प्रक्रिया की शुरुआत के साथ ही देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया के जरिए मुस्लिम वोटरों के नाम काटे जाएंगे. अब उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पूरी होकर पहला ड्राफ्ट सामने आ चुका है. आइए जानते हैं कि मुस्लिम बाहुल्यता वाले जिलों में इसका क्या असर पड़ सकता है.

कौन-कौन से जिलों पर पड़ेगा अधिक प्रभाव?

उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, उनमें पश्चिमी यूपी के रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा  बरेली शामिल है. वहीं पूर्वांचल और उसके आसपास के हिस्सों में बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती आते हैं.

2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर देखें तो इन जिलों में ज्यादातर सीटों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवारों की जीत हुई थी. अब सवाल यह है कि पहले ड्राफ्ट के बाद इन इलाकों में वोटरों की संख्या में कितना बदलाव आया है.

किस जिले में कितने वोट कटे?

  • रामपुर: पहले ड्राफ्ट में लगभग 18% वोटरों के नाम कटे. 
  • मुरादाबाद: सपा सांसद रुचि वीरा के क्षेत्र में करीब 16% वोट कटे.
  • बिजनौर: लगभग 16% वोटरों के नाम हटाए गए.
  • सहारनपुर: कटे वोटरों का आंकड़ा 16% के आसपास.
  • मुजफ्फरनगर: लगभग 16% वोट कटे.
  • अमरोहा: करीब 13% वोटरों के नाम हटाए गए.
  • बलरामपुर: सबसे ज्यादा, लगभग 26% वोट कटे.
  • बरेली: लगभग 21% वोटरों के नाम हटाए गए.
  • बहराइच: करीब 20% वोट कटे.
  • श्रावस्ती: लगभग 17% वोटरों के नाम हटाए गए.

राजनीतिक असर क्या हो सकता है?

राजनीतिक विश्लेषक योगेश मिश्रा का कहना है कि इन आंकड़ों को गहराई से देखने की जरूरत है. अगर कटे हुए वोटरों में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के हैं, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है. क्योंकि इन जिलों में मुस्लिम वोट बैंक सपा और अन्य विपक्षी दलों के लिए अहम रहा है. 

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