उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा ने मोबाइल और इंटरनेट के इस दौर में सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस मोबाइल फोन को हम मनोरंजन और सुविधाओं का साधन समझते हैं, वही आज हर पल एक नए खतरे का प्रवेश द्वार भी है. साइबर अपराध, विशेष रूप से ठगी और ब्लैकमेलिंग, अब न केवल आम जनता के लिए बल्कि पुलिस प्रशासन के लिए भी एक असाधारण चुनौती बन गई है.
राजीव कृष्ण
डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि साइबर अपराध का व्यापक स्वरूप हमारी आधुनिक जीवनशैली का ही एक 'बाय-प्रोडक्ट' है. कोविड काल से पहले भारत में ई-कॉमर्स और क्यूआर कोड का उपयोग एक बहुत ही सीमित वर्ग तक सीमित था, लेकिन महामारी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरतों ने देश को डिजिटल लेनदेन की ओर धकेल दिया. आज भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जहां एक सामान्य नागरिक सड़क पर मूंगफली वाले को भी ₹10 का भुगतान क्यूआर कोड के माध्यम से कर रहा है. डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती और सस्ते डेटा ने हमारी जिंदगी को सुगम तो बनाया है, लेकिन साथ ही हमें अदृश्य अपराधियों के निशाने पर भी ला खड़ा किया है.
इस खतरे से निपटने के लिए डीजीपी ने 'अवेयरनेस' (जागरूकता) को सबसे बड़ा एंटीडोट बताया है. उन्होंने समझाया कि साइबर अपराधी शारीरिक रूप से आपके सामने नहीं होता. वह दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर आपको मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित कर सकता है. ये अपराधी अक्सर 'डिजिटल अरेस्ट' और 'वीडियो कॉल' का डर दिखाकर या भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को फंसाते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की कोई भी सरकारी एजेंसी, चाहे वह पुलिस हो, सीबीआई हो या ईडी, कभी भी ऑनलाइन वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती और न ही पैसे की मांग करती है.
उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर जानकारी देते हुए राजीव कृष्णा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं. जहां कुछ साल पहले राज्य में केवल दो साइबर थाने थे, आज सभी 75 जिलों में समर्पित साइबर थाने कार्यरत हैं और हर सामान्य थाने पर साइबर हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है. पुलिस की इस मुस्तैदी का परिणाम यह रहा कि वर्ष 2025 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच करीब ₹326 करोड़ की ठगी गई राशि को फ्रीज कराया गया. उन्होंने जनता से अपील की कि यदि उनके साथ कोई साइबर फ्रॉड होता है, तो वे तुरंत 1930 पर सूचना दें ताकि अपराधियों के बैंक खातों को समय रहते ब्लॉक किया जा सके.














