यूपी में भूसे पर बवाल, प्राइमरी टीचरों को 46 किलो भूसा जुटाने के फरमान पर पलटे अधिकारी, आंदोलन की चेतावनी

यूपी के बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग के भूसा दान आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. 46 किलो भूसा अनिवार्य करने और कार्रवाई की चेतावनी वाले पत्र से शिक्षक नाराज हैं, जबकि दूसरे पत्र में इसे स्वेच्छा बताया गया है. जानिए DM साहब ने क्या कुछ कहा?

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भूसा दान आदेश पर बवाल: 46 किलो अनिवार्य निर्देश से बरेली के शिक्षकों में नाराजगी

Bhusa Daan Order UP Bareilly Teachers Protest: बरेली जिले में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा “भूसा दान” को लेकर जारी एक आदेश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी पत्र में प्रत्येक स्कूल से 46 किलो भूसा दान अनिवार्य किया गया और पालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई. इस आदेश के सामने आते ही शिक्षकों में आक्रोश बढ़ गया. वहीं मीरगंज से जारी एक अन्य पत्र में भूसा दान को पूरी तरह स्वैच्छिक बताया गया, जिससे भ्रम और विवाद और गहरा गया. जिला प्रशासन ने इस पर अनभिज्ञता जताई है, जबकि शिक्षक संगठन इसे अपमानजनक बताते हुए विरोध की तैयारी में जुट गए हैं.

46 किलो भूसा दान का आदेश बना विवाद की जड़

विवाद की शुरुआत नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव द्वारा जारी पत्र से हुई, जिसमें हर स्कूल से 46 किलो भूसा दान करने को कहा गया था. आदेश में यह भी उल्लेख था कि यदि इसका पालन नहीं किया गया तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. आदेश सामने आते ही शिक्षकों और शिक्षा विभाग में असंतोष फैल गया.

Bhusa Daan Order: मीरगंज का पत्र

मीरगंज में अलग निर्देश, बढ़ा भ्रम

जहां एक ओर नवाबगंज में सख्त आदेश जारी किया गया, वहीं मीरगंज के खंड शिक्षा अधिकारी अवनीश कुमार ने अलग पत्र जारी किया. इस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया कि शिक्षक अपनी स्वेच्छा से भूसा दान कर सकते हैं और इसके लिए किसी प्रकार की बाध्यता या कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. दो अलग-अलग आदेशों के कारण पूरे मामले में भ्रम और विवाद और बढ़ गया.

Bhusa Daan Order: नवाबगंज का पत्र

डीएम ने क्या कहा?

मामले ने तूल पकड़ने के बाद जब जिलाधिकारी से इस पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी आदेश की जानकारी नहीं है. उन्होंने बताया कि जिले में बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए अभियान चलाया जा रहा है और इसके तहत भूसा बैंक बनाए जा रहे हैं. लोगों से स्वेच्छा के आधार पर भूसा दान की अपील की गई है, लेकिन शिक्षकों पर कोई बाध्यता नहीं है.

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डीएम ने स्पष्ट किया कि जिले में अस्थायी और स्थायी गौशालाओं में गोवंश को रखा जा रहा है. उनके लिए चारा और भूसा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है.

इसके तहत आम जनता, सामाजिक संगठनों और सक्षम व्यक्तियों से सहयोग मांगा गया है. अधिकारियों को भी गोवंश गोद लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

Bhusa Daan Order: भूसा दान विवाद

शिक्षकों में बढ़ता आक्रोश

दूसरी ओर, शिक्षकों और उनके संगठनों ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया है. उनका कहना है कि शिक्षकों का प्राथमिक कार्य शिक्षा देना है, न कि इस प्रकार के गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाना. उन्होंने कहा कि पहले ही शिक्षकों पर जनगणना और अन्य सरकारी योजनाओं का बोझ है, ऐसे में भूसा दान जैसी जिम्मेदारियां देना अनुचित है.

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शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई की चेतावनी देकर उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है. कई शिक्षकों ने सवाल उठाया कि क्या अब उन्हें घर-घर जाकर भूसा इकट्ठा करना होगा. शिक्षक संगठनों ने कहा कि इस तरह के आदेश न केवल अनुचित हैं बल्कि शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ भी हैं.

शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि ऐसे आदेशों को तत्काल वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. उनका कहना है कि पूरा शिक्षक समाज इस मुद्दे पर एकजुट है और अपने सम्मान के साथ समझौता नहीं करेगा.

Bhusa Daan Order: शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन

‘गलती से आया कार्रवाई वाला बिंदु'

नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें उच्च स्तर से मिले निर्देशों के आधार पर पत्र जारी किया गया था. उन्होंने स्वीकार किया कि कार्रवाई वाला उल्लेख गलत तरीके से पत्र में शामिल हो गया था. बाद में इसे सुधारते हुए संशोधित पत्र जारी कर दिया गया है.

Bhusa Daan Order UP: संशोधित पत्र

मीरगंज अधिकारी का अलग रुख

मीरगंज के खंड शिक्षा अधिकारी अवनीश कुमार ने कहा कि उनके द्वारा जारी पत्र में कहीं भी कार्रवाई का जिक्र नहीं था. उन्होंने स्पष्ट किया कि भूसा दान पूरी तरह स्वैच्छिक है और शिक्षकों पर कोई दबाव नहीं बनाया गया है.

Bhusa Daan Order: विवाद और भ्रम

जिले में बड़ा मुद्दा बना मामला

दो अलग-अलग अधिकारियों द्वारा जारी विरोधाभासी आदेशों के बाद यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है. शिक्षकों में नाराजगी और प्रशासन की सफाई के बीच अब यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है. आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

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