उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में बुधवार को पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने मुमुक्षु आश्रम की 550 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय (Shukdevanand University) के नाम राज्य सरकार को दान कर दी. उनका कहना है कि यह संपत्ति अब शिक्षा के काम आएगी और युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करेगी. उन्होंने कहा कि स्वामी शुकदेवानंद ने अपना पूरा जीवन शाहजहांपुर जिले की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में लगा दिया. बता दें कि स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती स्वामी शुकदेवानंद डिग्री कॉलेज और मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता (डीन) भी हैं.
इस इलाके में शिक्षा की शुरुआत बहुत सीमित संसाधनों के साथ हुई थी. पहले यहां केवल कुछ ही कॉलेज थे और छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ, बरेली या दिल्ली तक जाना पड़ता था.
1940 में बनाया था गुरुकुल
स्वामी चिन्मयानंद ने बताया कि 1940 के दशक में शुकदेवानंद ने यहां गुरुकुल की शुरुआत की थी, फिर 1952 में इंटर कॉलेज और 1964 में डिग्री कॉलेज की नींव रखी. उनका सपना था कि शाहजहांपुर उच्च शिक्षा का ऐसा केंद्र बने, जहां छात्रों को बाहर न जाना पड़े. उन्होंने कहा कि उस समय जिले में शिक्षा की काफी कमी थी और छात्र कई मुश्किलों का सामना करते थे.
शाहजहांपुर में कमी थी विश्वविद्यालय की
स्वामी चिन्मयानंद ने बताया कि धीरे-धीरे यहां शिक्षा का विस्तार हुआ और आज जिले में कई कॉलेज बन चुके हैं, जिनमें से कई सरकारी हैं. फिर भी एक विश्वविद्यालय की कमी महसूस की जा रही थी. उन्होंने कहा कि लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि शाहजहांपुर में एक यूनिवर्सिटी बने ताकि, उच्च शिक्षा को और मजबूती मिल सके.
2018 में सीएम के साथ तलाश की जमीन
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई एक बैठक के बाद विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में काम तेज हुआ. बाद में जमीन की तलाश की गई और मुमुक्षु आश्रम परिसर की जमीन को इसके लिए चुना गया. इसी जमीन और संपत्ति को अब यूनिवर्सिटी के नाम ट्रांसफर किया गया है.
छात्रों के भविष्य के लिए दी जा रही संपत्ति
स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि उनका मकसद किसी निजी लाभ के लिए नहीं है, बल्कि समाज और शिक्षा के विकास के लिए है. उन्होंने कहा कि लगभग 550 करोड़ रुपये की यह संपत्ति अब सरकार को दी जा रही है, ताकि इससे हजारों छात्रों का भविष्य बन सके. उनके अनुसार यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी सौगात है.
उन्होंने यह भी कहा कि एक विकसित देश के लिए अच्छी और व्यवस्थित शिक्षा सबसे जरूरी है. अगर शिक्षा मजबूत होगी तो युवा आत्मनिर्भर बनेंगे और समाज आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जमीन या संपत्ति का दान नहीं है, बल्कि शिक्षा के भविष्य में निवेश है.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)













