गविष्टि गो-रक्षा धर्मयुद्ध यात्रा' पर हमीरपुर पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर अपने बयानों से सियासी हलचल तेज कर दी है. उन्होंने गाय और गौसंरक्षण के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों को निशाने पर लिया. “गाय 14 वर्ष तक मां रहेगी, उसके बाद सब्जी-भाजी हो जाएगी” जैसे तीखे बयान के जरिए उन्होंने हिंदुत्व की राजनीति पर सवाल उठाए और नेताओं की सोच को लेकर गंभीर टिप्पणी की.
रवींद्र निगम की रिपोर्ट...
गाय को लेकर सरकार पर तीखा हमला
हमीरपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कुछ नेताओं की बातों से यह साफ हो गया है कि उनका हिंदुत्व सिर्फ सीमित सोच तक सिमटा है. उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की बातों से असल सोच सामने आ जाती है. साथ ही उन्होंने असम के मुख्यमंत्री के बयान का हवाला देकर भी इसी तरह के दृष्टिकोण पर सवाल उठाए.
नमाज को लेकर भी दिया बयान
सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर भी शंकराचार्य ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि नमाज एक पवित्र धार्मिक क्रिया है और इसे किसी पवित्र स्थान पर ही अदा किया जाना चाहिए. सड़क आम जगह होती है, जहां लगातार आवागमन रहता है, ऐसे में वहां धार्मिक अनुष्ठान करना सही नहीं है.
गौशाला निरीक्षण को लेकर प्रशासन पर सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौशाला के निरीक्षण को लेकर स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने बताया कि वह एक गौ आश्रम का दौरा करना चाहते थे, लेकिन वहां ताला लगा दिया गया और उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई. प्रशासन की ओर से अनुमति की बात कही गई, जिससे उन्होंने नाराजगी जताई. उन्होंने दावा किया कि अंदर गायों की हालत बेहद खराब बताई जा रही है.
गौसंरक्षण पर सरकार से नाराजगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इतने वर्षों के बाद भी गौसंरक्षण को लेकर अपेक्षित काम नहीं हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में आज भी बड़े पैमाने पर गायों का कटान और व्यापार जारी है. उनका कहना था कि इस मुद्दे पर ठोस बदलाव की जरूरत है.
गौ रक्षा यात्रा का उद्देश्य
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उनकी यात्रा का मकसद गौमाता की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है. यह यात्रा गोरखपुर से शुरू होकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से गुजर रही है. उनके मुताबिक, इस अभियान के जरिए वह लोगों को जागरूक करना चाहते हैं और सरकार का भी ध्यान इस ओर खींचना चाहते हैं.














