- पश्चिम बंगाल के CM शुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में राज सिंह को गिरफ्तार किया गया है
- राज सिंह की बहन दीपशिखा सिंह ने हत्या की रात उनके बलिया में मौजूद होने के CCTV फुटेज और रसीद प्रस्तुत की है
- उत्तर 24 परगना से बलिया की दूरी लगभग बारह सौ किलोमीटर है, जिसे सड़क मार्ग से तय करने में लगभग बीस घंटे लगते हैं
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में एक नया मोड़ आ गया है. इस मामले में बंगाल पुलिस द्वारा उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी राज सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब उनके परिजनों ने पुलिसिया कार्रवाई को चुनौती दी है. राज सिंह की बहन और पेशे से वकील दीपशिखा सिंह ने चौंकाने वाले खुलासे करते हुए कुछ ऐसे साक्ष्य पेश किए हैं, जो राज सिंह की घटनास्थल पर मौजूदगी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. (करुणा सिंधु की रिपोर्ट)
राज सिंह बहन का दावा: हत्या की रात बलिया में था भाई
राज सिंह की बहन दीपशिखा सिंह ने मीडिया को सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करवाते हुए दावा किया है कि जिस रात चंद्रनाथ रथ की हत्या हुई, उस समय उनका भाई अपने घर बलिया (यूपी) में मौजूद था. दीपशिखा द्वारा जारी फुटेज में देखा जा सकता है कि 6 मई 2026 की रात 8 बजकर 52 मिनट पर राज सिंह अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से अपने घर पहुंच रहा है.
इतना ही नहीं, दीपशिखा ने एक कैश मेमो (रसीद) भी सार्वजनिक किया है. उनके अनुसार, राज सिंह ने 6 मई 2026 को बलिया शहर की एक दुकान से खरीदारी की थी, जिसका प्रमाण इस रसीद में दर्ज है.
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परगना से बलिया की दूरी
मामले की संवेदनशीलता इस बात से भी बढ़ जाती है कि 6 मई 2026 की रात को ही पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में बाइक सवार हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ की कार रुकवाकर उन पर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें उनकी जान चली गई.
तथ्यों पर गौर करें तो उत्तर 24 परगना से बलिया की दूरी लगभग 1261 किलोमीटर है. कार या अन्य सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में कम से कम 20 से 22 घंटे का समय लगता है. ऐसे में परिजनों का सवाल है कि जो व्यक्ति रात 9 बजे बलिया में सीसीटीवी में दिख रहा है, वह उसी रात बंगाल में हत्या जैसी वारदात को अंजाम कैसे दे सकता है?
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अयोध्या से हुई गिरफ्तारी
खबरों के मुताबिक, बंगाल पुलिस ने शनिवार रात को अयोध्या से राज सिंह को हिरासत में लिया. इसके बाद अगले दिन उसे फ्लाइट के जरिए पश्चिम बंगाल ले जाया गया, जहाँ कोर्ट में पेशी के बाद उसे 13 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. हालांकि, अभी तक पुलिस ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि राज सिंह की इस हत्याकांड में विशिष्ट भूमिका क्या थी? क्या वह शूटर के रूप में शामिल था या साजिशकर्ता के रूप में?
फिलहाल, दीपशिखा सिंह द्वारा पेश किए गए इन साक्ष्यों ने बंगाल पुलिस की जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. अब यह देखना होगा कि अदालत में इन सीसीटीवी फुटेज और कैश मेमो की क्या अहमियत रहती है?
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