- समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया.
- सपा सांसद इकरा हसन ने कहा कि आरक्षण से समाज में मनोवैज्ञानिक बदलाव और सामाजिक न्याय को बल मिलता है.
- सपा नेता शिवपाल यादव ने यूपी सरकार पर पीडीए आरक्षण में घोटाले और संविधान की अवहेलना का आरोप लगाया.
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य की सियासी सरगर्मी धीरे-धीरे तेज होने लगी है. इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को भाजपा सरकार पर संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘आरक्षण की लूट' से संबंधित ‘पीडीए ऑडिट' दस्तावेज जारी किया. वहीं, इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा सांसद इकरा हसन और सपा के नेता शिवपाल यादव ने भी भाजपा सरकार पर तीखे हमले करते हुए आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकार को घेरा.
सपा सांसद इकरा हसन ने कहा कि आरक्षण से समाज में मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव आता है. जब पीडीए समाज के लोग अपने बीच के किसी व्यक्ति को उच्च पद पर देखते हैं, तो वे शिक्षा और सरकारी पदों के लिए प्रेरित होते हैं और उनके अंदर भी विश्वास बढ़ता है. इससे समाज का मनोबल बढ़ता है और शोषण के खिलाफ लड़ने की शक्ति मिलती है. सामाजिक न्याय को बल मिलता है और देश एक साथ आगे बढ़ता है.
यूपी सरकार पीडीए आरक्षण में घोटाला कर रही है : शिवपाल यादव
समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने कहा कि यूपी सरकार पीडीए आरक्षण में घोटाला कर रही है. सरकार के लोग संविधान की शपथ लेते हैं, लेकिन उसका पालन नहीं किया जा रहा है. भगवान की कसम भी झूठी खाई जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान के नाम पर समाज को बांटने का काम किया जा रहा है और देश को कमजोर किया जा रहा है. देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है, इस पर भी सवाल उठते हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग झूठ बोल रहे हैं और बड़े नेता भी जनता को गुमराह कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी इसके खिलाफ लड़ेगी और लड़ती रहेगी. परिवर्तन होकर रहेगा. आज नहीं तो कल. हम न रुकेंगे, न डरेंगे. इन बेईमानों को सत्ता से बाहर करना होगा. ये लोग सीधे-सीधे आरक्षण का घोटाला कर रहे हैं. ऐसे लूटेरे लोगों को, जो देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जरूर सबक मिलना चाहिए.
वहीं, अखिलेश यादव ने कहा कि अगर हमें संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो इसका अभिप्राय है कि सरकार पक्षपाती है और जो पक्षपाती है वह बेवफा भी है. पूर्वाग्रह अपने आप में अन्याय है क्योंकि यह अधिकार छीन लेता है. आरक्षण सुरक्षा है. आरक्षण सामाजिक समन्वय का एक उपकरण और माध्यम भी है.'
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