संभल में कहां नमाज की अनुमति नहीं दी कि हाईकोर्ट ने कहा, DM-SP इस्तीफा दे दें, पूरी कहानी

यह पूरा मामला संभल के हयात नगर थाना क्षेत्र के एक गांव का है, जहां करीब 450 वर्ग फीट क्षेत्रफल में बनी घोसिया नाम की मस्जिद है. इस मस्जिद में नमाज पढ़े जाने पर रोक वाले प्रशासन के आदेश को हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए डीएम-एसपी को कड़ी फटकार लगाई है.

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संभल नमाज मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके बिश्नोई को कड़ी फटकार लगाई है.
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  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की मस्जिद में नमाज पर प्रशासन द्वारा लगाई गई संख्या सीमा को अवैध घोषित किया है.
  • कोर्ट ने DM और SP को कानून-व्यवस्था नहीं संभाल पाने पर इस्तीफा देने या तबादला कराने की सख्त टिप्पणी की.
  • याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने एक साल से नमाज पर रोक के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी और राहत पाई है.
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संभल/प्रयागराज:

उत्तर प्रदेश के संभल में नमाज पर रोक लगाने वाले प्रशासन के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने डीएम-एसपी पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इस्तीफा दीजिए या तबादला करवा लीजिए. हाईकोर्ट के इस फैसले का समाजवादी पार्टी के साथ-साथ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) ने स्वागत किया है. अदालत के फैसले पर AIMIM चीफ असदु्द्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा- उम्मीद है यूपी पुलिस इस फैसले से सीख लेगी. सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने प्रतिक्रिया देते अधिकारियों को नसीहत दी. उन्होंने अधिकारियों को कहा- आप सिविल सर्वेंट हैं, किंग नहीं. 

डीएम-एसपी पर तल्ख टिप्पणी- संभाल नहीं सकते तो इस्तीफा दे दें

दरअसल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभंल में एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के मामले में कहा कि प्रशासन किसी मस्जिद में नमाज़ पढ़ने वालों की संख्या तय नहीं कर सकता. साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अगर डीएम (डॉ. राजेंद्र पेंसिया) और एसपी (कृष्ण कुमार बिश्नोई) कानून-व्यवस्था नहीं संभाल सकते तो इस्तीफा दे दें या अपना तबादला करवा लें.

संभल का वो मस्जिद जहां नमाज पढ़े जाने से रोकने पर हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी.

संभल के हयात नगर थाना क्षेत्र का मामला

यह पूरा मामला हयात नगर थाना क्षेत्र के एक गांव का है, जहां करीब 450 वर्ग फीट क्षेत्रफल में बनी घोसिया नाम की मस्जिद है. प्रशासन के मुताबिक जमीन का गट नंबर 291 है. डाक्यूमेंट्स में जमीन मोहन सिंह और भूराज सिह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर है, इलाके में लगभग 2700 से ज्यादा लोग रहते हैं. याचिकाकर्ता मुनाजिर खान के अनुसार, पिछले साल फरवरी में हयातनगर थाने से पुलिसकर्मी गांव पहुंचे थे और उन्होंने निर्देश दिया कि मस्जिद में एक समय में केवल 20 लोग ही नमाज़ पढ़ सकते हैं, जबकि एक बार में 5–6 लोगों को ही नमाज़ अदा करने की अनुमति दी जाएगी.

एक साल से लोगों को नमाज पढ़ने से रोका जा रहा

इस आदेश के खिलाफ मुनाजिर खान ने 18 जनवरी 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस मामले अदालत का आदेश आज हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है. याचिकाकर्ता मुनाजिर खान का कहना है कि मस्जिद में नमाज़ पढ़ने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. उन्होंने बताया कि करीब एक साल से लोगों को नमाज़ पढ़ने से रोका जा रहा था. इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अब अदालत से उन्हें राहत मिली है.

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हालांकि इस पूरे मामले को लेकर राजेंद्र पेंसिया (जिलाधिकारी सम्भल) और  कृष्ण कुमार बिश्नोई  (पुलिस अधीक्षक सम्भल) से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

AIMIM चीफ ने फैसले का किया स्वागत

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है, जिसमें संभल पुलिस के अजीबोगरीब आदेश खारिज किए गए—निजी जमीन पर नमाज पर रोक लगाई गई थी. कानून-व्यवस्था राज्य की जिम्मेदारी है. यूपी में यह चलन बन रहा है: एक मामले में घर के अंदर नमाज के लिए हिरासत, संभल में 20 से ज्यादा नहीं. उम्मीद है यूपी पुलिस सीख लेगी."

जस्टिस अतुल श्रीधरन और सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ में सुनवाई

यह फैसला रमजान के दौरान निजी जमीन (जिसे याचिकाकर्ता मस्जिद बताता है) पर नमाज अदा करने से रोक लगाने के खिलाफ आया है. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि गाटा संख्या 291 पर मस्जिद है, जहां रमजान में बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ना चाहते हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने केवल 20 लोगों को अनुमति दी थी.

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राज्य पक्ष ने मालिकाना हक पर विवाद उठाया और कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन मोहन सिंह और भूरज सिंह के नाम दर्ज है. प्रशासन का तर्क था कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के कारण संख्या सीमित की गई. कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया.

याचिकाकर्ता मुनाजिर खान.

कोर्ट ने कहा- कानून-व्यवस्था राज्य का कर्तव्य

बेंच ने कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य का कर्तव्य है, आम नागरिकों का नहीं. यदि एसपी और कलेक्टर को लगता है कि वे कानून का राज लागू नहीं कर सकते, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से तबादला करवा लेना चाहिए." अदालत ने दोहराया कि निजी संपत्ति पर पूजा-अर्चना के लिए राज्य से अनुमति की जरूरत नहीं है. हस्तक्षेप केवल तब जरूरी है जब धार्मिक गतिविधि सार्वजनिक भूमि पर हो या सार्वजनिक संपत्ति तक फैले.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पूरक हलफनामा दाखिल करने का मौका दिया, जिसमें मस्जिद की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे. मामले को 16 मार्च 2026 को सूचीबद्ध किया गया है.

सपा के पूर्व सांसद बोले- अधिकारियों का काम सियासत नहीं, कानून-व्यवस्था संभालना

संभल मस्जिद मामले पर सपा के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासनिक आदेश पर सवाल उठाए. डॉ. एसटी हसन ने कहा- अधिकारियों का काम सियासत नहीं, कानून-व्यवस्था संभालना है. संविधान हर नागरिक को अपनी संपत्ति पर इबादत और पूजा का अधिकार देता है. अधिकारियों को नसीहत देते हुए सपा के पूर्व सांसद ने कहा- आप सिविल सर्वेंट हैं, किंग नहीं.

मुरादाबाद का उदाहरण देते हुए सपा नेता ने कहा कि मंशा सही हो तो शांति बनाए रखना मुश्किल नहीं. शांति बनाए रखने में नाकाम अधिकारियों को जिम्मेदारी छोड़ देनी चाहिए.

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