उत्तर प्रदेश के चर्चित और लगभग एक दशक से लंबित इंस्पेक्टर अनिल कुमार मौत मामले में आखिरकार न्याय की जीत हुई है. लखनऊ स्थित सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने शनिवार को इस हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने आरोपी जीशान खान को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही दोषी पर 9,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है.
2015 की वो रहस्यमयी रात
यह मामला 19 नवंबर 2015 का है. प्रतापगढ़ के होटल वैष्णवी स्थित मॉडल शॉप में तत्कालीन कोतवाली एसएचओ (SHO) अनिल कुमार का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया था. उस समय इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया था. शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था, लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों के भारी दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपने की मांग उठी.
CBI की जांच और सजा तक का सफर
2018 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के कड़े आदेश के बाद इस केस की जांच सीबीआई के हाथों में गई. सीबीआई ने 29 जून 2018 को नए सिरे से केस दर्ज किया और गहन छानबीन के बाद जीशान खान और बोचा उर्फ राजू सोनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
मुकदमे के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब 4 अप्रैल 2026 को जीशान खान ने अदालत में लिखित रूप से अपना गुनाह स्वीकार कर लिया. इसके बाद कोर्ट ने उसका ट्रायल मुख्य केस से अलग कर दिया. अदालत ने 2 मई 2026 को अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि रिकॉर्ड पर मौजूद पुख्ता सबूतों और आरोपी के इकबालिया बयान पर आधारित है. हालांकि, इस मामले में दूसरे सह-आरोपी बोचा उर्फ राजू सोनी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई अब भी जारी है.
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