- उत्तर प्रदेश सरकार ने ईंधन की कालाबाजारी रोकने के लिए अब तक कुल 233 एफआईआर दर्ज की हैं
- प्रदेश में तेरह मार्च से अब तक उन्नीस हजार आठ सौ बयासी छापेमारी और निरीक्षण की कार्रवाई हुई है
- राज्य में पेट्रोल का स्टॉक सत्तानबे हजार किलोलीटर और डीजल का एक लाख छब्बीस हजार किलोलीटर उपलब्ध है
ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से दुनिया भर में छाये ईधन संकट के बीच उत्तर प्रदेश में पेट्रोल/डीज़ल और एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए योगी सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है. पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर शिकंजा कसने के लिए हुई कार्रवाई में अब तक 233 एफआईआर दर्ज की गई है. इसके अलावा सरकार की कोशिश है कि ईधन की किल्लत भी ना हो और ना ही किसी तरह से अफ़वाह से लोगों में पैनिक फैले.
यूपी में 13 मार्च से लेकर अब तक कुल 19,882 निरीक्षण/छापे की कार्रवाई हुई है. एलपीजी गैस सिलेंडर के डिस्ट्रीब्यूटर्स के ख़िलाफ़ कुल 33 और कालाबाजारी में शामिल लोगों के खिलाफ 200 एफआईआर दर्ज की गई है. इस बीच छापेमारी के दौरान 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. राज्य सरकार ने ज़िलाधिकारियों को निर्देश देकर नीचे के अधिकारियों की टीम बनाकर लगातार छापेमारी कर कार्रवाई करने को कहा है.
हाल ही में अफवाह फैली कि पेट्रोल डीज़ल की सप्लाई कम होने वाली है. इस अफ़वाह का असर ये हुआ कि रातों रात पेट्रोल पम्प पर गाड़ियों की लाइन लग गई. गाड़ियों के अलावा लोगों ने ड्रम और यहां तक की बाल्टी में भी पेट्रोल/डीज़ल भराने की कोशिश की. इस बीच तीन चार दिन की अफ़रातफ़री के बाद हालत सामान्य हुए और अब पेट्रोल पम्प आम दिनों की तरह चल रहे हैं.
ईधन की बात करें तो पेट्रोल डीज़ल की किल्लत अब तक सामने नहीं आई है. हालांकि एलपीजी सिलेंडर को लेकर लोगों में अभी भी परेशानी दिखाई दे रही है. ब्लैक में सिलेंडर लेने वालों से लेकर कमर्शियल गैस सिलेंडर से व्यापार करने वालों को दिक्कत आ रही है. सरकार का दावा है कि इस समस्या का भी जल्द समाधान हो जाएगा. इस बीच उन छोटी दुकानों पर भी छापामारी जारी है जहां बड़े सिलेंडर से छोटे सिलेंडर में गैस की रीफिलिंग की जाती थी.
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