वर्दी हो गई नतमस्तक... SHO ने कानपुर में सांसद के छुए पैर, VIDEO वायरल होते ही भड़के लोग

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे चंद सेकेंड के इस वीडियो ने पुलिस महकमे के अनुशासन और राजनीतिक रसूख के बीच की बारीक लकीर को उजागर कर दिया है. 

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  • कानपुर देहात के शिवली कोतवाली प्रभारी SHO ने भाजपा सांसद के पैर छूकर सोशल मीडिया पर विवादित वीडियो वायरल हुआ
  • पुलिस मैनुअल में वर्दीधारी पुलिसकर्मी केवल वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय प्रतीकों को ही सैल्यूट कर सकते हैं
  • कोतवाल द्वारा सांसद के पैर छूना पुलिस नियमों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता माना जा रहा है
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उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी का रौब और इकबाल अक्सर अपराधियों के पसीने छुड़ाने के लिए जाना जाता है, लेकिन कानपुर देहात से आई एक तस्वीर ने इस इकबाल को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. मामला शिवली कोतवाली क्षेत्र का है, जहां ऑन ड्यूटी तैनात कोतवाल साहब का स्थानीय सांसद के चरणों में नतमस्तक होना चर्चा का विषय बन गया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे चंद सेकेंड के इस वीडियो ने पुलिस महकमे के अनुशासन और राजनीतिक रसूख के बीच की बारीक लकीर को उजागर कर दिया है. 

घटना शिवली कोतवाली क्षेत्र के रंजीतपुर गांव की है. यहां एक निजी विद्यालय में कार्यक्रम का आयोजन था, जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर अकबरपुर लोकसभा सीट से भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले शिरकत करने पहुंचे थे. प्रोटोकॉल के तहत क्षेत्र की सुरक्षा और वीआईपी मूवमेंट को संभालने की जिम्मेदारी शिवली कोतवाली प्रभारी प्रवीन सिंह के कंधों पर थी.

आम तौर पर वर्दीधारी पुलिसकर्मी जब किसी जनप्रतिनिधि से मिलते हैं, तो सैल्यूट या जय हिंद के साथ उनका अभिवादन करते हैं. लेकिन यहां नजारा कुछ अलग था. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही सांसद महोदय सामने आए, कोतवाल प्रवीन सिंह झुके और उनके पैर छू कर आशीर्वाद लिया. इसे देखकर ऐसा लगा मानो सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही खाकी, खादी के सम्मान में दंडवत हो गई हो.


जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया के गलियारों में पहुंचा, इसने तूफान खड़ा कर दिया. पुलिस मैनुअल स्पष्ट कहता है कि वर्दी में तैनात पुलिसकर्मी केवल अपने वरिष्ठ अधिकारियों, संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों को ही सैल्यूट कर सकता है. किसी भी राजनीतिक व्यक्ति या अन्य नागरिक के पैर छूना न केवल पुलिस रेगुलेशन का उल्लंघन है, बल्कि इसे गंभीर अनुशासनहीनता भी माना जाता है. वर्दी की अपनी एक गरिमा होती है, जो किसी व्यक्ति विशेष के आगे झुकने की इजाजत नहीं देती.
 

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