ग्रेटर नोएडा में युवराज की मौत को 6 दिन पूरे, हादसे वाली जगह पर अब तक क्या-क्या बदला?

Greater Noida Accident: एक पिता के सामने उसके बेटे की जान चली गई, वो भी अपनी ही सोसायटी के महज 400 मीटर की दूरी पर. लेकिन उसके बावजूद ना तो गड्ढे से पानी कम हुआ है ना ही दीवार बनी है. और ना ही इस दर्दनाक घटना के लापरवाहों को कोई ठोस सजा मिली है.

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ग्रेटर नोएडा में हादसे वाली जगह पर कैसे हैं हालात.
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  • ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में कार गड्ढे में गिरने से युवराज मेहता की मौत प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है
  • दुर्घटना स्थल पर 90 डिग्री के शार्प टर्न के पास अब दो स्पीड ब्रेकर लगाए गए हैं जिन पर सफेद निशान बनाए गए हैं
  • युवराज की मौत के बाद नोएडा विकास प्राधिकरण ने गड्ढों की सफाई करवाई और आसपास की जंगली झाड़ियां हटवाईं
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ग्रेटर नोएडा:

ग्रेटर नोयडा के सेक्टर 150 में कार गड्ढे में गिरने की घटना को एक हफ्ता होने को है. प्रशासनिक लापरवाही से युवराज मेहता की मौत हो गई. पूरे देश में इस मामले की चर्चा जोरों पर है. युवराज से पहले भी कई सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं. युवराज की मौत के बाद वे मामले भी फिर से ताज हो उठे हैं. इस बीच बड़ा सवाल यह है कि अब भी प्रशासन की नींद खुली या नहीं. युवराज की मौत वाली जगह पर पिछले 6 दिनों में क्या-क्या बदला है. 

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नोएडा के सेक्टर 150 की वो जगह, जहां 90 डिग्री का शार्प टर्न है. उसी दुर्घटना वाली जगहों से करीब 10 फिट की दूरी पर एक स्पीड ब्रेकर बनाया गया है. जबकि बुधवार तक इस स्पीड ब्रेकर का कोई निशान नहीं लगाया गया था. रात में अगर आप यहां से गुजरेंगे तो इस स्पीड ब्रेकर को आप नहीं देख पाएंगे. बुधवार तक इस स्पीड ब्रेकर पर सफेद रंग का निशान नहीं था. लेकिन गुरुवार को दोनों स्पीड ब्रेकर्स पर सफेद रंग से पट्टी बना दी गई है. 

युवराज मेहता की मौत के पांच दिन बाद नोएडा विकास प्राधिकरण को पानी भरी जगह के आसपास सफ़ाई का ख्याल आया. गुरुवार सुबह से ही दो बुलडोज़र लगाकर घटनास्थल वाली जगह के आसपास गड्डों को भरा गया. जंगली झाड़ियों की सफ़ाई करवाई गई. नोएडा विकास प्राधिकरण के कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारियों ने इस इलाके को साफ़ सुधरा करने को कहा है.

काश इस सड़क के शार्प कट और उसके किनारे बने गहरे तालाब के बीच कोई अवरोधक होता या सीमेंट की ऊंची दीवार होती तो शायद युवराज को बचाया जा सकता था. उसकी कार सीधे गहरे पानी में नहीं जा पाता. लेकिन अब प्रशासन की नींद खुल गई है और यहां कुछ सीमेंट के होल्डर रखे गए हैं. वहीं इन शार्प कट पर पुलिस ने फिलहाल बैरिकेडिंग कर दी है. 

घटना वाली जगह पर कवरेज करने आ रहे पत्रकार और कई दलों के नेताओं की आवाजाही देखकर पुलिस की मुस्तैदी बढ़ गई है. पुलिस अंदरखाने से बोल रही है कि जबतक लोग इधर आ रहे हैं तब तक उनकी ड्यूटी भी यहां रहेगी. आमतौर पर ये इलाक़ा सन्नाटा और अंधेरे से घिरा रहता था. लेकिन अब यहां पर आसपास के थानों की पुलिस और PAC लगाई गई है.

युवराज की मौत की खबर देखकर आसपास के तमाम लोग यहां फोटो या वीडियो बनाने आ रहे हैं. सोसायटी में रहने वाले उनके पारिवारिक दोस्त शलभ भी अपनी बेटी के साथ घटना स्थल पर पहुंचे. उनका कहना था कि कम से कम मेरी 14 साल की बेटी को ये पता चले कि प्रशासनिक लापरवाही से कैसे जान जा सकती है. इस घटना से वह अंदर तक हिल गए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही से अगर बच्चे की जान जाती है तो हम कोसने के सिवाय क्या कर सकते हैं. इसीलिए वह खुद अपनी बेटी को लेने और छोड़ने स्कूल जाते हैं. उन्होंने कहा कि यहां पर नेटवर्क भी नहीं आता है. बस सोसायटी के वाईफाई से ही काम चलाना पड़ता है. 

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एक पिता के सामने उसके बेटे की जान चली गई, वो भी अपनी ही सोसायटी के महज 400 मीटर की दूरी पर. लेकिन उसके बावजूद ना तो गड्ढे से पानी कम हुआ है ना ही दीवार बनी है. और ना ही इस दर्दनाक घटना के लापरवाहों को कोई ठोस सजा मिली है.
 

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