संभल में पोते ने की 1978 में हुई दादा की हत्या की जांच की मांग, जिलाधिकारी के आदेश पर शुरू हुई कुंए की खुदाई

उत्तर प्रदेश के संभल के जिला अधिकारी ने एक व्यक्ति की शिकायत पर एक कुएं की खुदाई शुरू करवाई है. इस व्यक्ति का आरोप है कि 1978 के दंगे में उसके दादा की हत्या कर उनका शव कुएं में दफना दिया गया था.

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संभल:

उत्तर प्रदेश के संभल में 1978 में हुए दंगे में हुई एक बुजुर्ग की कथित हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल उस बुजुर्ग के पोते ने जिलाधिकारी को तहरीर पर इस मामले को फिर से खोलने और जांच कराने की मांग की है. पोते की तहरीर पर जिलाधिकारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. इसके बाद पुराने कुएं की खुदाई शुरू कर दी गई है.

क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के संभल में 1978 में हुए दंगे से जुड़ा एक पुराना हत्याकांड फिर सुर्खियों में आ गया है. पीड़ित परिवार के सदस्य कपिल रस्तोगी ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपने दादा रामसरन दास रस्तोगी की मौत की दोबारा जांच की मांग की है. कपिल रस्तोगी का आरोप है कि 1978 के दंगे के दौरान दंगाइयों ने दुकान पर बैठे उनके दादा की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी थी और शव को कुएं में फेंक दिया था. कपिल के मुताबिक उस समय नखासा थाना क्षेत्र में धारा 136/78, 302 और 201 IPC के तहत मामला दर्ज तो हुआ था, लेकिन राजनीतिक दबाव और कुछ प्रभावशाली लोगों के दखल के चलते जांच को जानबूझकर कमजोर कर दिया गया.उनका आरोप है कि उनके परिवार को धमकाया गया और पुलिस रिपोर्ट भी कथित रूप से अदालत तक सही रूप में नहीं पहुंचने दी गई. कपिल का कहना है कि उनके दादा की हत्या करने वाले लोगों को सालों तक संरक्षण मिलता रहा. इस वजह से मामला धीरे-धीरे दबा दिया गया. अब उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए एक बार फिर कार्रवाई की गुहार लगाई है.

कपिल रस्तोगी की ओर से जिलाधिकारी को दिया गया आवेदन पत्र.

कपिल रस्तोगी की शिकायत के बाद जिलाधिकारी डॉक्टर राजेंद्र पसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई मौके पर पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां बुजुर्ग को कथित रूप से मारकर कुएं में फेंक दिया गया था. निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर पुराने कुएं की खुदाई शुरू कराई गई है.खुदाई के दौरान वहां एक मजार होने की भी जानकारी सामने आई है.प्रशासन ने इसकी अलग से जांच शुरू कर दी है. 

क्या कहना है पोते का

कपिल रस्तोगी का कहना है कि उनके दादा की मौत जिला इतिहास की एक दर्दनाक घटना है.उन्होंने मांग की है कि 1978 के दंगे की पूरी पारदर्शी जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाए.इसके साथ ही उन्होंने उसी स्थान पर अपने दादा की प्रतिमा स्थापित करने और उनके नाम पर चौराहा घोषित करने की भी मांग की है. कुएं की खुदाई और प्रशासनिक सक्रियता के बाद यह मामला एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है.

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