4 करोड़ का फ्लैट जलकर खाक, अब किराए पर रहने को मजबूर-गौर ग्रीन सोसाइटी के जले फ्लैट्स मालिकों की आपबीती

गौर ग्रीन सोसायटी की आग में करोड़ों रुपये के फ्लैट जलकर खाक हो गए. 4 करोड़ के फ्लैट और महंगे इंटीरियर गंवाने वाले परिवार अब मजबूरी में रिश्तेदारों के यहां या किराए के घरों में रह रहे हैं.

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8 फ्लैट जले, सिर्फ 2 का इंश्योरेंस, कई परिवार किराए पर मजबूर
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  • इंदिरापुरम की गौर ग्रीन सोसायटी में लगी आग ने आठ फ्लैट्स को पूरी तरह जलाकर तबाह कर दिया
  • जले फ्लैट्स में से केवल दो का ही इंश्योरेंस था, जिससे प्रभावितों की आर्थिक मदद सीमित रही
  • आग सबसे पहले डी-ब्लॉक के फ्लैट नंबर 943 में लगी, जहां रेनोवेशन का काम चल रहा था
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घर, जो सालों-साल की कमाई, सपनों और कड़ी मेहनत से बनता है, कुछ ही घंटों में आंखों के सामने जलकर खाक हो जाए. किसी भी फैमिली के लिए भला इससे बड़ा सदमा क्या हो सकता है. इंदिरापुरम की गौर ग्रीन सोसायटी में लगी आग ने सिर्फ दीवारें और फर्नीचर नहीं जलाए, बल्कि उन लोगों की उम्मीदों को भी तोड़ दिया, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की जमा‑पूंजी एक घर में लगा दी थी. में जले फ्लैट्स के मालिकों की आपबीती बेहद दर्दनाक है. एक फ्लैट मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनका फ्लैट करीब 4 करोड़ रुपये का था और उसके इंटीरियर पर ही उन्होंने 60 लाख रुपये खर्च किए थे.

4 करोड़ का फ्लैट, 60 लाख का इंटीरियर, सब जलकर खाक

घर के मालिक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उसका सब कुछ बर्बाद हो गया. यह कहते हुए उसकी आंखें नम हो गईं. दरअसल जिन 8 फ्लैट्स में आग लगी, उनमें से एक फ्लैट उनका भी था. उन्होंने बताया कि पिछले ही साल पूरे फ्लैट का काम पूरा करवाया था, लेकिन अब सारी जमा पूंजी उसी फ्लैट के साथ जलकर खाक हो गई और उन्हें मजबूरी में किराए के मकान में रहना पड़ेगा. बुधवार को गौर ग्रीन सोसायटी में लगी भीषण आग में करोड़ों रुपये के फ्लैट्स पूरी तरह जल गए. यह आग इंदिरापुरम की इस पॉश सोसायटी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी. गौर ग्रीन के एक रेजिडेंट ने बताया कि आग सबसे पहले डी‑ब्लॉक के फ्लैट नंबर 943 में लगी थी, जहां रेनोवेशन का काम चल रहा था. इसके बाद आग तेजी से ऊपर के फ्लैट्स तक फैल गई और एक के बाद एक कई फ्लैट इसकी चपेट में आ गए.

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8 फ्लैट जले, सिर्फ 2 का इंश्योरेंस, कई परिवार किराए पर मजबूर

आग में जले 8 फ्लैट्स में से सिर्फ 2 फ्लैट्स का ही इंश्योरेंस था. जानकारों के मुताबिक, इंश्योरेंस की रकम कितनी मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि फ्लैट मालिकों ने इंश्योरेंस के समय क्या‑क्या डिक्लेयर किया था. फिलहाल हालात यह हैं कि जिनके फ्लैट जल चुके हैं, वे या तो अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरे हैं या फिर किराए का फ्लैट लेने को मजबूर हो गए हैं. सोसायटी ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए भी कदम उठाए हैं. गौर ग्रीन सोसायटी ने जले फ्लैट्स के मालिकों की सहायता के लिए एक ग्रुप बनाया है, ताकि जरूरत के समय आपसी सहयोग मिल सके.

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सोसायटी के फायर सिस्टम ने साथ दिया, फिर भी जख्म गहरे

NDTV ने गौर ग्रीन सोसायटी के पूर्व प्रेसिडेंट राजीव वधावन से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि सोसायटी ने पिछले ही साल आग से बचाव के पूरे सिस्टम को नया करवाया था, जिस पर करीब 70 लाख रुपये खर्च किए गए थे. खुद गाजियाबाद के चीफ फायर ऑफिसर राहुल पाल भी मानते हैं कि गौर ग्रीन सोसायटी में आग से बचाव के जो इंतज़ाम किए गए थे, वे मौके पर काम कर रहे थे और इसी वजह से फायर ब्रिगेड को आग बुझाने में काफी मदद मिली. हालांकि, इसके बावजूद जिन लोगों ने अपने सपनों का घर खो दिया, उनके लिए यह हादसा एक ऐसा जख्म छोड़ गया है, जिसे भरने में वक्त लगेगा.

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