इटावा ड्रोन हादसा: हेलीकॉप्टर जैसा दिखने वाला कौन-सा था ये ड्रोन और गिरने की क्‍या रही वजह, जानें सबकुछ

फिक्स्ड विंग यूएवी की तो ये दो तरह के होते हैं. एक फ्यूल से चलता है और दूसरा इलेक्ट्रिक यूएवी होता है. जिस यूएवी के साथ हादसा हुआ है, इसकी तस्वीर देखकर साफ है कि इसमें मोटर लगी है यानी यह इलेक्ट्रिक यूएवी है. ये बैटरी से उड़ता है और इसकी लोड उठाने की क्षमता यानी पे-लोड तीन से चार किलो तक होती है.

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  • उत्तर प्रदेश के इटावा में शुक्रवार को हेलीकॉप्टर जैसा दिखने वाला ड्रोन खेत में गिर गया, जिससे हड़कंप मच गया.
  • ड्रोन एलएटी एयरोस्पेस कंपनी का था, जिसे नागरिक उड्डयन विभाग से उड़ाने की अनुमति प्राप्त थी.
  • यह ड्रोन फिक्स्ड विंग यूएवी था, जो इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है और तीन से चार किलो तक वजन उठा सकता है.
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उत्तर प्रदेश के इटावा में शुक्रवार को एक हेलीकॉप्टर जैसा दिखने वाला ड्रोन खेत में गिर गया. इस ड्रोन के गिरने के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी इस ड्रोन के गिरने से मची अफरातफरी को लेकर चिंता जाहिर की. इसके बाद इटावा के जिला प्रशासन ने सफाई देते हुए बताया कि ये ड्रोन एक प्राइवेट कंपनी का था और एक्सपेरिमेंट के लिए इसको उड़ाया गया था. इस कंपनी में ड्रोन उड़ाने की अनुमति भी ले रखी है. 

ये ड्रोन दरअसल एक यूएवी यानी अनमैंड एरियल व्हीकल है. इसका शेप हेलीकॉप्टर जैसा था. ये एलएटी एयरोस्पेस नाम की कंपनी का ड्रोन था और इसके लिए नागरिक उड्डयन विभाग से बाकायदा अनुमति ली गई थी. इस कंपनी ने प्रोटोटाइप की टेस्ट फ्लाइंग की थी, जो हवाई पट्टी से थोड़ी दूरी पर जाकर गिर गया. 

इस तरह से जानिए इस यूएवी के बारे में 

यह एक फिक्स्ड विंग यूएवी है और इसमें सरवो मोटर लगी होती है. यह सर्विलांस के साथ किसी चीज को ड्रॉप करने के भी काम आता है. हालांकि इसे उड़ान भरने के लिए रन-वे की जरूरत होती है. हालांकि बहुत लंबे रन-वे की जरूरत नहीं है. ये सिर्फ 100-200 मीटर की दूरी में उड़ जाता है. एरियल डिस्टेंस के हिसाब से ये 200 से 300 किलोमीटर तक जा सकता है. 

फिक्स्ड विंग यूएवी की तो ये दो तरह के होते हैं. एक फ्यूल से चलता है और दूसरा इलेक्ट्रिक यूएवी होता है. जिस यूएवी के साथ हादसा हुआ है, इसकी तस्वीर देखकर साफ है कि इसमें मोटर लगी है यानी यह इलेक्ट्रिक यूएवी है. ये बैटरी से उड़ता है और इसकी लोड उठाने की क्षमता यानी पे-लोड तीन से चार किलो तक होती है. इसको उड़ाने की परमिशन डीजीसीए से मिलती है. 

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फ्लाइट कंट्रोलर में खराबी के कारण गिरा!

इस यूएवी के हादसे को लेकर ड्रोन एक्सपर्ट का कहना है कि इसके गिरने की वजह तकनीकी खराबी है. इसके अंदर एक फ्लाइट कंट्रोलर लगा होता है. यह फ्लाइट कंट्रोलर एक तरह से ड्रोन का ब्रेन होता है. इसमें खराबी आने से ही ज्यादातर हादसे होते हैं. हालांकि इटावा में हुआ हादसा फ्लाइट कंट्रोलर की खराबी है, किसी चिड़िया से टकराना है या कुछ और, ये जांच से ही साफ हो पाएगा.  

नैनो से लार्ज तक, पांच तरह के होते हैं ड्रोन 

आसान भाषा में समझें तो ड्रोन पांच तरह के होते हैं. पहला नैनो, दूसरा माइक्रो, तीसरा स्माल, चौथा मीडियम और पांचवां लार्ज ड्रोन होता है. नैनो ड्रोन 250 ग्राम तक का भार उठा सकते हैं, वहीं माइक्रो ड्रोन 2 किलो तक का वजन उठा लेते हैं. स्माल ड्रोन 2 से 25 किलो तक वजन उठाने की क्षमता रखते हैं तो मीडियम ड्रोन 25-150 किलो और लार्ज ड्रोन 150 किलो से ऊपर का होता है. जिस ड्रोन के साथ हादसा हुआ है, ये ज्‍यादातर सर्विलांस के लिए काम आता है. हालांकि इससे ड्रॉपिंग भी की जा सकती है. 

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प्रोटोटाइप की टेस्‍ट फ्लाइट के दौरान गिरा

इटावा के एडीएम अभिनव रंजन ने ड्रोन हादसे को लेकर प्रशासन का पक्ष रखते हुए बताया कि शुक्रवार शाम करीब साढ़े छह बजे एक ड्रोन खेत में गिर गया. इस ड्रोन को एलएटी एयरोस्पेस नाम की कंपनी इस्तेमाल करती है. इस कंपनी को नागरिक उड्डयन विभाग से सैफई की हवाई पट्टी से ड्रोन उड़ाने की अनुमति पहले से मिली हुई है. उन्होंने बताता कि इस यूएवी के प्रोटोटाइप की टेस्ट फ्लाइट की जा रही थी, जो हवाई पट्टी सैफई के पास नंदपुर गांव के खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस घटना में कोई जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ है. 
 

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