एनाटॉमी से एक्वाटिक तक, MBBS छात्रा की राष्ट्रीय उड़ान!

NEET की तैयारी और फिर MBBS की भारी-भरकम पढ़ाई. इस वजह से पूरे 8 सालों तक कॉम्पिटिटिव स्विमिंग से इनका नाता टूट गया. मेडिकल कॉलेज में आते ही उनकी ये पुरानी आग फिर से भड़क उठी.

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MBBS Student Cracks National Swimming:  कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज एक दुखद घटना की वजह से देशभर के सुर्खियों में था, जब OPD भवन की पानी की टंकी में एक शव मिलने से सनसनी फैल गई थी, लेकिन अब उसी मेडिकल कॉलेज से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक  खबर सामने आई है. ये खबर आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि अगर इंसान में 'पैशन' हो, तो वो कुछ भी कर सकता है.

सोचिए देश की सबसे मुश्किल परीक्षा NEET क्रैक करके MBBS की पढ़ाई करना और फिर उसी पढ़ाई के बीच 'नेशनल लेवल' की स्विमिंग चैंपियनशिप में अपनी जगह बना लेना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है.

हम सब जानते हैं कि मेडिकल की पढ़ाई यानी MBBS करना कितना मुश्किल है. दिन-रात किताबों में घुसे रहना पड़ता है. लेकिन देवरिया के 'महर्षि देवराहा बाबा ऑटोनोमस स्टेट मेडिकल कॉलेज' (MDBASMC) की MBBS थर्ड ईयर की छात्रा आयुषी सिंह ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो सबके लिए एक मिसाल है.

आयुषी सिंह ने किया ऐसा कारनामा

आयुषी ने हरियाणा में आयोजित खेलो इंडिया अस्मिता वीमेंस तैराकी की जोनल प्रतियोगिता के 2 सौ मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में चौथा स्थान हासिल कर अगले महीने अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लिया है. इस छात्रा ने सिर्फ मेडिकल की पढ़ाई ही नहीं की बल्कि अपने बचपन के एक ऐसे शौक को फिर से जिंदा किया है, जिसे उसने 8 साल पहले छोड़ दिया था. अब वो नेशनल लेवल की स्विमिंग चैंपियनशिप में उड़ान भरने जा रही है.

बता दें कि जब ये सिर्फ 5 साल की थीं, तब पहली बार स्विमिंग पूल में उतरी थीं. और यहीं से शुरू हुआ पानी के साथ इनका एक ऐसा रिश्ता, जो उम्र भर का पैशन बन गया. इनकी पहली कोच  मिसेज आर. सी. यादव ने इस छोटी सी बच्ची के अंदर अनुशासन (Discipline) और कभी हार ना मानने वाली लगन (Perseverance) भर दी. स्कूल के दिनों में इस लड़की ने सिर्फ स्विमिंग ही नहीं की, बल्कि टेनिस, बास्केटबॉल और ट्रैक एंड फील्ड भी खेला. मतलब एकदम 'Jack of all trades'!

लेकिन फिर आया करियर का वह मोड़ जहां अक्सर लोगों के शौक छूट जाते हैं. NEET की तैयारी और फिर MBBS की भारी-भरकम पढ़ाई. इस वजह से पूरे 8 सालों तक कॉम्पिटिटिव स्विमिंग से इनका नाता टूट गया. लेकिन कहते हैं 'अगर आग अंदर हो, तो वो कभी बुझती नहीं है.'

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देवरिया मेडिकल कॉलेज में आते ही उनकी ये पुरानी आग फिर से भड़क उठी. और इसमें उनका साथ उनके नए कोच 'अरविंद गुप्ता' ने दिया. देवरिया के रविंद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में उन्होंने फिर से प्रैक्टिस शुरू की और 8 साल के उस लम्बे गैप को सिर्फ अपनी मेहनत से मिटा दिया. और आज रिजल्ट सबके सामने है- उनका सिलेक्शन नेशनल लेवल के लिए हो चुका है.

आप सोचेंगे कि एक पढ़ी-लिखी, कॉन्वेंट एजुकेटेड, नेशनल स्विमर और होने वाली डॉक्टर की हॉबी और क्या हो सकती है? सुनकर थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन मूलरुप से उत्तरप्रदेश के बाराबंकी की रहने वाली आयुषी ने बताया की उन्हे लोकल भाषा यानी 'भोजपुरी' सुनना, समझना और बोलना अच्छा लगता है.उनका मानना है कि जब एक डॉक्टर अपने मरीजों से उनकी अपनी लोकल भाषा में बात करता है, तो वो सिर्फ उनकी बीमारी को नहीं समझता, बल्कि उनकी भावनाओं (Emotions) से जुड़ जाता है.

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अब सवाल ये आता है कि इतना सब कुछ बिना स्ट्रेस के कोई कैसे कर सकता है? इसका क्रेडिट वो अपने माता-पिता को देती हैं. उनके पेरेंट्स ने कभी भी उन पर नतीजों का या 'फर्स्ट आने' का प्रेशर नहीं डाला. उन्होंने बस एक ही बात सिखाई अपने पैशन को खुलकर जियो.

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