मेरठ दलित युवती अपहरण कांड-चंद्रशेखर को रोकने के लिए दिल्ली से मेरठ तक चार स्तर की नाकेबंदी

मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित लड़की के अपहरण और उसकी मां की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है. मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित घर में घुसकर मां की हत्या कर दी गई और बेटी का अपहरण कर लिया गया.

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  • मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित लड़की के अपहरण और मां की हत्या के बाद प्रशासन ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया
  • पुलिस ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विपक्षी नेताओं की गांव में एंट्री पर पूरी तरह पाबंदी लगाई
  • भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के गांव पहुंचने पर पुलिस ने तीन अलग-अलग जगहों पर नाकाबंदी कर काफिले को रोका
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मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित लड़की के अपहरण और उसकी मां की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है. मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित घर में घुसकर मां की हत्या कर दी गई और बेटी का अपहरण कर लिया गया. जहां एक तरफ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लग रहा है. वहीं, दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था का हवाला देते हुए नेताओं की एंट्री पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है.

नेताओं की गांव में एंट्री पर रोक

मेरठ हत्याकांड में दलित परिवार से मिलने जा रहे नगीना के सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद को रोकने के लिए पुलिस ने दिल्ली से मेरठ तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी है. जानकारी के मुताबिक, आज़ाद को गांव तक पहुंचने से रोकने के लिए चार स्तर की नाकेबंदी की गई है.

कहां-कहां है पुलिस का पहरा?

पहली नाकेबंदी: दिल्ली के नज़दीक काशीपुर टोल प्लाजा पर.

दूसरी नाकेबंदी: मेरठ के पास सिवाय टोल प्लाजा पर.

तीसरी नाकेबंदी: कपसाढ गांव के नज़दीक कई छोटे-बड़े नाके.

इसके अलावा गाजीपुर टोल प्लाजा से लेकर मेरठ तक पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है.

    सिवाया टोल प्लाजा: यहां सपा विधायक अतुल प्रधान को पहले ही रोक लिया गया है. प्रशासन और समर्थकों के बीच यहां तीखी बहस की खबरें हैं. कपसाड़ गांव की सीमा और मुख्य रास्तों पर पुलिस के दर्जनों छोटे-बड़े नाके लगाए गए हैं. इससे पहले कपसाड़ टोल नाके पर कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल को भी रोक दिया गया था, जिससे विपक्ष में भारी आक्रोश है.

    क्या है मामला और क्यों बढ़ रहा है जातीय तनाव?

    कपसाड़ गांव में एक दलित लड़की के अपहरण और उसकी मां की हत्या का आरोप राजपूत समाज के एक युवक पर लगा है. इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में जातीय ध्रुवीकरण की कोशिशें तेज हो गई हैं. हालांकि, गांव के जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.

    "अपराधी की कोई जाति नहीं होती" - राजपूत समाज का रुख

    एनडीटीवी संवाददाता रवीश रंजन शुक्ला ने जब कपसाड़ गांव के राजपूत समाज के लोगों से बात की, तो उन्होंने एक सुर में इस घटना की निंदा की. ग्रामीणों का कहना है, "राजपूत समाज ने स्पष्ट किया कि वे पीड़ित दलित परिवार के साथ खड़े हैं और न्याय की मांग करते हैं. ग्रामीणों ने कहा कि नेता एक पूरी जाति को बदनाम न करें. अपराधी हर जाति में होते हैं और उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए. स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद गांव के सभी वर्गों ने मिलकर आरोपी को पकड़ने की कोशिश की थी. ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ बाहरी लोग और नेता जाति के नाम पर गांव में दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.

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    फिलहाल कपसाड़ गांव में भारी पुलिस बल की मौजूदगी है. गांव में तनाव तो है, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए पीएसी और स्थानीय पुलिस गश्त कर रही है. प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल किसी भी बड़े नेता को गांव में घुसने से रोकना है ताकि माहौल और न बिगड़े.

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