खुशियों के आंगन में 'जहर' बनकर परोसा गया खाना; गोद भराई में 60 लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार

बुलंदशहर के जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव सलगमा में एक गोद भराई कार्यक्रम के दौरान दूषित भोजन (मटर पनीर और छेना रसगुल्ला) खाने से करीब 50-60 लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए. बीमारों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने खाने के सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी है.

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बुलंदशहर: गोद भराई कार्यक्रम में मटर पनीर और रसगुल्ला खाने से 60 लोग बीमार

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक परिवार में नए मेहमान के आने की खुशी में आयोजित 'गोद भराई' का कार्यक्रम मातम और चीख-पुकार में बदल गया. जहांगीराबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव सलगमा में आयोजित इस समारोह में दूषित भोजन करने से करीब 60 लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए हैं. बीमारों में महिलाओं और मासूम बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मचा हुआ है. (ज़िशान अली की र‍िपोर्ट)

कैसे बिगड़ी स्थिति? 

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी प्रेम सिंह के घर में गोद भराई का उत्सव था. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सगे-संबंधी और ग्रामीण भोजन कर रहे थे. मेनू में मटर पनीर की सब्जी, छोले-चावल और मिठाई में छेना रसगुल्ला परोसा गया था. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि खाना खाने के करीब एक से दो घंटे बाद मेहमानों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. देखते ही देखते कई लोगों को तेज पेट दर्द, लगातार उल्टियां और दस्त की शिकायत होने लगी.

अस्पताल में मची अफरा-तफरी

जैसे ही बीमारों की संख्या बढ़ी, ग्रामीण निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से मरीजों को लेकर जहांगीराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भागे. एक साथ 60 मरीजों के पहुंचने से अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. वार्डों में बेड कम पड़ गए, जिसके बाद डॉक्टरों ने जमीन पर गद्दे बिछाकर और आपातकालीन व्यवस्था कर इलाज शुरू किया. डॉक्टरों के अनुसार, कई मरीजों की हालत बेहद गंभीर थी, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल और निजी हायर सेंटर्स के लिए रेफर कर दिया गया है.

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची. खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश कुमार ने बताया, "प्रथम दृष्टया यह मामला मटर पनीर या छेना रसगुल्ले में इस्तेमाल हुई खराब सामग्री (मावा या पनीर) का लग रहा है. हमने मौके से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र कर लिए हैं, जिन्हें राजकीय प्रयोगशाला भेजा जा रहा है. जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी."

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फिलहाल, गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और स्वास्थ्य विभाग की एक टीम गांव में भी कैंप कर रही है ताकि अन्य संभावित मरीजों की निगरानी की जा सके. यह घटना एक बार फिर उत्सवों में खान-पान की शुद्धता और खाद्य सुरक्षा विभाग की सतर्कता पर बड़े सवाल खड़े करती है.

आयोजक, प्रेम सिंह: "हमने बड़ी खुशी से कार्यक्रम किया था और मटर पनीर व छोले-चावल बनवाए थे. हमें अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ हो जाएगा. खाना खाने के बाद अचानक सबको दिक्कत होने लगी. 

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