जब अटल बिहारी वाजपेई ने दिया था कांशीराम को राष्ट्रपति बनने का ऑफर, BSP संस्थापक का क्या था जवाब? रोचक किस्सा

लेखक बद्रीनारायण ने अपनी किताब में बताया कि हां ये बात बिल्कुल सही है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कांशीराम को राष्ट्रपति बनने का ऑफर दिया था. उन्होंने बताया कि यह तब की बात है जब उत्तर प्रदेश में भाजपा और बसपा की मिली-जुली सरकार चल रही थी.

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kansira jayanti today
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  • बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की 92वीं जयंती पर लखनऊ में पार्टी का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था
  • कांशीराम और मायावती के राजनीतिक महत्व को देखते हुए बसपा समर्थकों की बड़ी संख्या कार्यक्रम में शामिल हुई थी
  • अटल बिहारी वाजपेयी ने कांशीराम को राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया था जब यूपी में भाजपा और बसपा गठबंधन में थे
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लखनऊ:

आज बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक और सर्वसम्मानित मान्यवर कांशीराम की जयंती है. बसपा और उनकी सुप्रीमो मायावती के लिए कंशीराम क्या वजूद रखते हैं,किसी से छिपा नहीं है. उनकी 92वीं जयंती पर लखनऊ में बसपा का कार्यक्रम भी हुआ जिसमें बड़ी संख्या में समर्थकों की भीड़ उपस्थित थी. कांशीराम की बात हो ही रही है तो उनसे जुड़ा एक किस्सा आपको बताते हैं. ये किस्सा कांशीराम और देश के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई की मुलाकात और उस बीच दिए एक ऑफर से जुड़ा है. आइए जानते हैं ये दिलचस्प किस्सा. 

कांशीराम को पू्र्व पीएम का खास ऑफर

कांशीराम के लिए अटल बिहारी वाजपेई इसलिए भी न भूलने वाली शख्सियत हैं क्योंकि ये उनकी बसपा ही थी जिसने पूर्व प्रधानमंत्री की सरकार एक वोट से गिरा दी थी. लेकिन इससे इतर अटल जी ने कांशीराम को राष्ट्रपति बनने का ऑफर दिया था. इस किस्से का जिक्र है  कांशीराम की जीवनी 'कांशीराम: द लीडर ऑफ द दलित्स' में. इसे लिखने वाले शख्स थे बद्रीनारायण. 

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लेखक बद्रीनारायण ने अपनी किताब में बताया कि हां ये बात बिल्कुल सही है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कांशीराम को राष्ट्रपति बनने का ऑफर दिया था. उन्होंने बताया कि यह तब की बात है जब उत्तर प्रदेश में भाजपा और बसपा की मिली-जुली सरकार चल रही थी. वक्त दोनों दलों में अच्छे संबंध थे. उसी बीच अटल बिहारी वाजपेई ने कांशीराम को देश का राष्ट्रपति बनने का ऑफर दिया था. फिर इतना बड़ा पद कांशीराम ने ठुकराया क्यों था?

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कांशीराम के राष्ट्रपति पद ठुकराने के पीछे की वजह?

देश के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई ने जब बसपा के संस्थापक कांशीराम को राष्ट्रपति पद के लिए ऑफर दिया तो उन्होंने ठुकरा दिया था.  बद्री नारायण ने अपनी किताब में बताया कि कांशीराम ये जानते थे कि असली पावर राष्ट्रपति में नहीं बल्कि प्रधानमंत्री बनने में है. वह यह जानते थे कि राष्ट्रपति बनाकर उन्हें चुपचाप बैठा दिया जाएगा. जिसके लिए वह तैयार नहीं थे. यही कारण था कि तब कांशीराम ने वाजपेयी से कहा था कि वह राष्ट्रपति नहीं बल्कि प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं.

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