सपा के PDA पर बीजेपी का बड़ा पलटवार, बता दी नई परिभाषा

समाजवादी पार्टी का ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारा अब सियासी विवाद में घिर गया है. अमेठी और चंदौली में सपा नेताओं पर हमले की घटनाओं के बाद भाजपा और सहयोगी दलों ने इस मुद्दे को उठाते हुए सपा पर निशाना साधा है.

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सपा के पीडीए पर सियासी घमासान
ANI
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  • समाजवादी पार्टी ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को जोड़ने के लिए पीडीए का नारा बनाया था.
  • भाजपा ने सपा के दो नेताओं की पिटाई को लेकर पीडीए को पीड़ा, दमन और अपराध करार दिया है.
  • अमेठी में पूर्व मंत्री की पत्नी के घर घुसकर हुई मारपीट में सपा नेताओं के आपसी आरोप सामने आए.
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पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को साथ लाने की कोशिश में जुटी समाजवादी पार्टी ने 'पीडीए' का नारा गढ़ा. इस नारे का असर बीते लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला, लेकिन अब इसी ‘पीडीए' पर BJP हमलावर हो गई है. मामला सपा के दो नेताओं की पिटाई से जुड़ा है, जिसे भाजपा ने ‘पीडीए' से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि सपा का पीडीए दरअसल ‘पीड़ा, दमन और अपराध' है.

BJP के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर हमला बोला है. पंकज चौधरी ने ‘पीडीए' को ‘पीड़ा, दमन और अपराध' करार दिया. वहीं, ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सपा का पीडीए दरअसल ‘पहला दावा अहीर का' है. अहीर यानी यादव समाज का नाम लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा में यादव समाज के लोग अन्य पिछड़ों को निशाना बना रहे हैं.

दरअसल, बीते तीन दिनों में पिटाई और मारपीट की दो घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पीड़ित भी सपाई हैं और आरोपी भी. पहला मामला अमेठी का है, जहां सपा विधायक और जेल में बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी प्रजापति के घर में घुसकर कुछ लोगों ने मारपीट की. घटना के बाद महाराजी प्रजापति और उनके बेटे ने स्थानीय सपा नेताओं पर हमला और मारपीट के आरोप लगाए.

दूसरा मामला चंदौली का है, जहां समाजवादी पार्टी की महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल के घर में घुसकर कुछ लोगों ने उनकी पिटाई की. यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई, जिसमें आरोपियों को बाल खींचते और मारपीट करते देखा गया. गार्गी पटेल ने अमित यादव, मनोज यादव समेत कुछ महिलाओं पर आरोप लगाया है. बताया जा रहा है कि आरोपी भी सपा से जुड़े हुए हैं.

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अमेठी और चंदौली की ये घटनाएं भले ही आपसी विवाद की लगती हों, लेकिन ये सपा के लिए राजनीतिक समस्या बन रही हैं. भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने पीड़ित और आरोपियों के पिछड़े वर्ग से जुड़े होने का मुद्दा उठाते हुए सीधे ‘पीडीए' के नारे पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल इन मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी ने चुप्पी साध रखी है, जबकि यूपी की राजनीति में ‘पीडीए' का नारा अब सपा और भाजपा के बीच सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है.

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