- विजय मिश्र, उनकी पत्नी, पुत्र और बहू को जमीन हड़पने व धोखाधड़ी मामले में कठोर कारावास की सजा मिली है
- 2020 में रिश्तेदार द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में विजय मिश्र पर पैतृक संपत्ति पर दबाव बनाकर कब्जा के आरोप थे
- विजय मिश्र को सामूहिक दुष्कर्म मामले में भी सजा सुनाई गई है, इसके अलावा आर्म्स एक्ट उल्लंघन का भी मामला है
उत्तर प्रदेश के भदोही की राजनीति में वर्षों तक दबदबा रखने वाले बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्र और उनके पूरे परिवार पर आखिरकार कानून का शिकंजा पूरी तरह कस गया है. गोपीगंज पुलिस थाना क्षेत्र से जुड़े बहुचर्चित जमीन हड़पने और धोखाधड़ी के मामले में, भदोही की एमपी-एमएलए कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. न्यायालय ने पूर्व विधायक विजय मिश्र, उनकी पत्नी व पूर्व एमएलसी रामलली मिश्र और उनके बेटे विष्णु मिश्र को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. वहीं, उनकी बहू रूपा मिश्र को 4 वर्ष के कारावास की सजा दी गई है. इस फैसले के बाद भदोही के राजनीतिक गलियारों में दिनभर हलचल बनी रही. (गिरीश पांडे की रिपोर्ट)
पैतृक संपत्ति पर दबाव बनाकर कब्जे का आरोप
यह मामला वर्ष 2020 में तब सुर्खियों में आया था, जब विजय मिश्र के ही एक रिश्तेदार ने गोपीगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था. आरोप था कि पैतृक संपत्ति पर दबाव बनाकर कब्जा करने, जबरन वसीयत कराने, जान से मारने की धमकी देने और आर्थिक लेनदेन को अवैध रूप से अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की गई. मुकदमा दर्ज होने के बाद भदोही पुलिस ने सक्रियता दिखाई और विजय मिश्र को मध्य प्रदेश के आगर जिले से गिरफ्तार किया गया. इसी गिरफ्तारी के बाद बाहुबली परिवार की मुश्किलों का वह दौर शुरू हुआ, जो आज तक थमने का नाम नहीं ले रहा है.
ढहता गया बाहुबल और रसूख का साम्राज्य
राजनीतिक रसूख और बाहुबल के दम पर वर्षों तक इलाके में एकछत्र राज करने वाले विजय मिश्र का साम्राज्य धीरे-धीरे ढहता चला गया. जमीन विवाद के अलावा, वाराणसी की एक गायिका ने विजय मिश्र और उनके परिवार पर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) का गंभीर आरोप लगाया था. उस मामले में भी एमपी-एमएलए कोर्ट ने 4 नवंबर 2023 को विजय मिश्र को 15 वर्ष के कारावास और 1 लाख 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी. इसके अतिरिक्त, आर्म्स एक्ट के एक मामले में भी उन्हें ढाई वर्ष की सजा मिल चुकी है.
जेल की सलाखों के पीछे पूरा परिवार
सिर्फ विजय मिश्र ही नहीं, बल्कि उनका बेटा विष्णु मिश्र भी गैंगरेप, धोखाधड़ी, जमीन कब्जाने और आर्म्स एक्ट समेत कई संगीन मामलों में जेल में बंद है. हालांकि, कुछ मामलों में उसे जमानत मिल चुकी है, लेकिन अन्य गंभीर आरोपों के कारण वह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सका है. वहीं, विजय मिश्र के भतीजे और डीघ ब्लॉक के पूर्व प्रमुख मनीष मिश्र भी दुष्कर्म पीड़िता को धमकाने और फर्जी शस्त्र लाइसेंस जैसे मामलों में सलाखों के पीछे हैं. कभी जिले की सत्ता का केंद्र माना जाने वाला यह परिवार आज पूरी तरह कानूनी कानूनी उलझनों में फंसा हुआ है.
एक अरब से अधिक की संपत्ति कुर्क
भदोही पुलिस ने विजय मिश्र के विरुद्ध अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए अपराध के जरिए अर्जित की गई उनकी संपत्तियों पर कड़ा प्रहार किया है. अब तक पुलिस प्रशासन विजय मिश्र की एक अरब रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति कुर्क और जब्त कर चुका है. कभी लाव-लश्कर और समर्थकों के काफिले के साथ चलने वाला यह परिवार आज अदालतों और जेलों की चारदीवारी तक सिमट गया है. एमपी-एमएलए कोर्ट के इस हालिया फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि रसूख चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून की पहुंच से बाहर नहीं है.
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