- आगरा के एक परिवार ने अपने पालतू लेब्राडॉर कुत्ते टाइगर के लिए अंतिम संस्कार और हवन कराया
- टाइगर की मौत के बाद परिवार ने गंगाजी राजघाट पर हिंदू रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया
- अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने तेरहवीं संस्कार किया और आत्मा की शांति के लिए ब्रह्मभोज कराया
हमारे देश में किसी के गुजर जाने पर उसके अंतिम संस्कार से लेकर उसकी तेरहवीं और श्राद्ध किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि मृत आत्मा को शांति मिलेगी,लेकिन क्या किसी जानवर की मौत पर भी ऐसी क्रियाएं मुमकिन हैं? आप शायद विश्वास न करें पर ऐसा हुआ है. आगरा के एक परिवार ने पशु प्रेम की अनोखी मिशाल पेश की है.परिवार ने अपने पालतू लेब्राडॉर कुत्ते को मौत के बाद भावुक विदाई ही नहीं दी बल्कि अंतिम संस्कार के साथ हवन और ब्रह्मभोज भी कराया.
टाइगर की मौत पर ऐसी मिसाल
आगरा के शाहदरा बगीची निवासी घनश्याम दीक्षित दिल्ली से लेब्राडोर नस्ल का कुत्ता खरीदकर ले आए थे. प्यार से उनके परिवार ने इसका नाम ‘टाइगर' रखा था.टाइगर परिवार का चहेता हो गया था. लोग उसे खूब मानते थे, लेकिन एक माह पहले टाइगर की तबीयत बिगड़ गई और बाद में दुखद मौत हो गई.
हिंदू रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार
परिवार ने उसे घर का सदस्य मानते हुए पूरे विधि-विधान से गंगाजी राजघाट पर उसका अंतिम संस्कार किया. कुत्ते के अंतिम सफर में मोहल्ले वाले भी आए थे.परिवार ने इसके बाद तेरहवीं संस्कार भी किया और 13 दिन बाद आत्मा की शांति के लिए हवन और ब्रह्मभोज भी कराया. यही नहीं परिवार के पुरुष सदस्यों ने बकायदा मुंडन भी कराया था.परिवार का कहना है कि टाइगर सिर्फ पालतू नहीं,परिवार का हिस्सा था.














