EPFO: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अब अपनी निवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. अभी तक EPFO अपनी पांच अलग-अलग योजनाओं के पैसों से हर महीने ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश करता है, अब यह तरीका बदलने वाला है. EPFO इन पांचों योजनाओं के पैसों को एक ही खाते में जोड़ देगा. महीने‑महीने निवेश करने की जगह EPFO अब साल में एक बार ही ETF में पैसा लगाएगा. इससे निवेश से जुड़ी प्रक्रियाएं और कागजी कार्रवाई काफी आसान हो जाएगी.
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EPFO क्या योजना बना रहा है?
EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अभी अपनी पांच योजनाओं से अलग-अलग खातों के जरिए हर महीने ETF में निवेश करता है. अब EPFO इन पांचों योजनाओं के पैसों को एक ही खाते में मिलाएगा और साल में एक बार ही ETF में निवेश करेगा. इस बदलाव से निवेश की प्रक्रिया और कागजी कामकाज दोनों आसान हो जाएंगे. इसके अलावा EPFO दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट कंपनी (DMEDL) के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) के चौथे बायबैक में भी हिस्सा लेगा. कंपनी हर एक बॉन्ड को 1,03,468 में खरीदने की पेशकश कर रही है, जबकि उसकी मूल कीमत 1,00,000 है. ये सभी प्रस्ताव EPFO की इन्वेस्टमेंट कमिटी ने मंजूर कर दिए हैं. अब इन्हें 2 मार्च को होने वाली EPFO की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में पेश किया जाएगा.
इन प्रस्तावों को EPFO की इन्वेस्टमेंट कमेटी पहले ही मंजूरी दे चुकी है. अब इन्हें 2 मार्च को होने वाली EPFO की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा, लेकिन इस बैठक के एजेंडा में 2025-26 के लिए EPFO कितना ब्याज देगा, इस बारे में कोई घोषणा शामिल नहीं है. ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के एजेंडा में यह भी बताया गया है कि EPFO ETF में निवेश से जुड़ी मौजूदा दिक्कतों को हल करने के लिए एक नया SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करेगा.
अभी EPFO 2016 से बनाए गए पुराने SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के अनुसार काम करता है. इस SOP के तहत EPFO हर योजना के पैसे को अलग‑अलग निवेश करता है और इन्हें एक साथ नहीं जोड़ता, लेकिन अब EPFO इस तरीके को बदलना चाहता है. ऐसा करने से बाजार के उतार‑चढ़ाव से होने वाले जोखिम कम हो सकेंगे. अभी ETF निवेश के लिए हर महीने 20 तारीख से लेकर अगले महीने की 19 तारीख तक का चक्र चलता है, लेकिन सालाना निवेश (Annual SIP) लागू होने के बाद यह मासिक सिस्टम जरूरी नहीं रहेगा.














