सड़क पर गाड़ियां आपस में बात करेंगी, दुर्घटनाएं कम होंगी! ऐसा क्‍या करने जा रही सरकार 

सरकार, सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए V2V कम्‍यूनिकेशन टेक्‍नोलॉजी यानी वाहन-से-वाहन संचार प्रौद्योगिकी लाने पर काम कर रही है. इसके लिए दूरसंचार विभाग से मंजूरी मिल गई है. पूरी डिटेल पढ़ें विस्‍तार से.

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Cars can Communicate: आपस में बात करेंगी कारें तो दुर्घटनाएं कम होंगी!
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  • केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि वाहन-से-वाहन संचार प्रौद्योगिकी से सड़क दुर्घटनाएं कम हो सकती हैं
  • दूरसंचार विभाग ने वी2वी कम्युनिकेशन के लिए आवश्यक स्पेक्ट्रम के उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है
  • वाहन एक-दूसरे से रियल टाइम अलर्ट प्राप्त करेंगे, जिससे ड्राइवर समय रहते जरूरी कदम उठा सकेंगे
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कैसा हो अगर सड़क पर आपकी कार, मेरी कार से बात करे! हमारी और आपकी कार, हाईवे पर चल रही लॉरी और ट्रकों से बात करे! एक्‍सप्रेस-वे पर चल रही सारी गाड़ियां आपस में बात करे! सोचने में थोड़ा अजीब लग रहा हो, लेकिन ऐसा हुआ तो पता है, सबसे बड़ा फायदा क्‍या होगा? सड़क दुर्घटनाएं कम होंगी. जैसे हम और आप, सड़क पर चलते हुए एक-दूसरे को देखते हैं, बात करते हैं तो आपस में टकराते नहीं हैं, उसी तरह से बात गाड़ियां भी आपस में बात करेंगी तो दुर्घटनाएं कम होंगी. आपको लग सकता है कि हम ये सब बातें आखिर यूं ही हवा में कर रहे हैं, पर ऐसा नहीं है. 

दरअसल सरकार, सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए V2V कम्‍यूनिकेशन टेक्‍नोलॉजी यानी वाहन-से-वाहन संचार प्रौद्योगिकी लाने पर काम कर रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को इस बारे में जानकारी दी है. इसके लिए दूरसंचार विभाग से मंजूरी मिल गई है. 

कैसे आपस में बात करेंगे वाहन? 

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार वाहन-से-वाहन संचार प्रौद्योगिकी लाने पर काम कर रही है, जिसकी मदद से वाहन एक-दूसरे से सीधे संवाद कर सकेंगे. इससे कार, ट्रक या अन्‍य वाहन ड्राइव कर रहे व्‍यक्ति को आसपास मौजूद अन्य वाहनों के बारे में अलर्ट मिलेगा. 

इसमें आसपास के वाहनों की स्‍पीड, स्थिति, तेजी, ब्रेक लगाने की जानकारी के बारे में रियल टाइम अलर्ट मिलेगा. यही नहीं, खास तौर से फॉग यानी कोहरे या अन्‍य कारणों से अचानक नजर न आने वाली जगह में मौजूद वाहनों के बारे में भी रियल टाइम अलर्ट मिलेगा.

कैसे कम होंगी सड़क दुर्घटनाएं?  

इस तरह के अलर्ट्स मिलने से ड्राइवर, समय रहते जरूरी कदम उठा पाएगा और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी. जैसे कि पीछे से तेज स्‍पीड से आ रहे किसी वाहन के बारे में अलर्ट मिलते ही वो अपनी गाड़ी किनारे कर लेगा. इसी तरह कुहासे में सड़क पर खड़ी गाड़ी के बारे में अलर्ट मिलते ही वहां वो अपनी कार की स्‍पीड कम कर देगा और बचाते हुए निकल पाएगा.  

इस दिशा में कितना आगे बढ़ा काम?

नितन गडकरी ने बताया, 'सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए  V2V कम्‍यूनिकेशन टेक्‍नोलॉजी लाने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग के साथ एक संयुक्त कार्यबल (Joint Workforce) का गठन किया गया है. दूरसंचार विभाग ने वी2वी संचार के लिए 30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम (5.875-5.905 गीगाहर्ट्ज) के उपयोग को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है.'

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गडकरी ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की वार्षिक बैठक के बाद कहा कि सरकार सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, कानूनों को सख्ती से लागू करने और यातायात नियमों के उल्लंघन पर दंड बढ़ाकर सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने की कोशिश कर रही है. 

इस बैठक में सड़क सुरक्षा, यात्रियों और आम जनता की सुविधा, कारोबारी सुगमता और वाहनों से संबंधित नियमों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.

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हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में हर साल करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है। इनमें से करीब 66 प्रतिशत मौतें 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की होती हैं.

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इसके साथ ही गडकरी ने बताया कि सरकार आगामी बजट सत्र में मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन लाने की तैयारी कर रही है. प्रस्तावित 61 संशोधनों का उद्देश्य सड़क सुरक्षा में सुधार, कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देना, नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाना, गतिशीलता में सुधार करना, परिभाषाओं एवं भाषा को सरल बनाना और वैश्विक मानकों के अनुरूप कानूनों को सामंजस्यपूर्ण बनाना है. 

इसके अलावा बसों, स्लीपर कोचों और यात्री वाहनों के लिए बेहतर सुरक्षा मानकों, बस बॉडी कोड, बीएनसीएपी सुरक्षा रेटिंग और चरणबद्ध तरीके से 'उन्नत ड्राइवर सहयोग प्रणाली' (ADAS) लागू करने जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया. बैठक में यातायात उल्लंघनों की निगरानी के लिए अंक-आधारित प्रणाली शुरू करने और एक निश्चित वाहन भार तक के सभी मालवाहक वाहनों के लिए डिजिटल और स्वचालित परमिट जारी करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई. 

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