पब्लिक सेक्टर बैंकों के सम्मलेन में 'युवाओं के लिए बैंकिंग' पर जोर, युवाओं तक बेहतर वित्तीय सेवाएं पहुंचाने पर

पब्लिक सेक्टर बैंकों के सम्मेलन में युवाओं तक बेहतर और सुलभ वित्तीय सेवाएं पहुंचाने के लिए बैंकिंग क्षेत्र की नई रणनीतियों पर मंथन किया गया.

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Public Sector Banks Conference

युवाओं के लिए बैंकिंग महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की युवा और तेजी से डिजिटल होती आबादी ही बचत, कर्ज, निवेश  और वित्तीय सेवाओं (financial services) के भविष्य को आकार देगी", वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव संजय लोहिया ने दिल्ली में पब्लिक सेक्टर बैंकों और पब्लिक फाइनेंसियल इंस्टीटूशन के प्रमुखों के एक सम्मलेन में ये अहम बात कही. वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग द्वारा आयोजित दो-दिवसीय PSB Confluence सोमवार को शुरू हुआ. इसके एजेंडा में 'युवाओं के लिए बैंकिंग' को एक अहम थीमेटिक फोकस के तौर पर शामिल किया गया है.

सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पीएसबी सम्मेलन का उद्घाटन किया. इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) के करीब 125 अधिकारी भाग ले रहे हैं. 

युवाओं तक बेकिंग सेवाओं की पहुंच आसान बनाएं 

बैंकिंग सुविधाओं को युवाओं तक आसानी से पहुंचाने को प्राथमिकता करार देते हुए सचिव संजय लोहिया ने कहा, "यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम युवाओं तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान बनाएं, चाहे वह बैंक खाते खोलने की बात हो, शिक्षा के लिए लोन उपलब्ध कराने की हो या नए कारोबार शुरू करने की."

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) के वरिष्ठ अधिकारीयों को सम्बोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट के एक दस्तावेज में युवाओं को अलग-अलग कैटेगरी और उम्र के ग्रुप में बांटा गया है, जिसमें बताया गया है कि भारत की 29 प्रतिशत आबादी 15 से 29 साल की उम्र के बीच है".

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वित्त मंत्री ने कहा, यह सम्मलेन ऐसे समय पर हो रहा है जब विकसित भारत के लिए बैंकिंग और भारत को विकसित भारत बनाने में बैंकों की भूमिका पर विचार करने के लिए एक हाई-पावर्ड कमिटी के गठन की जल्दी ही उम्मीद है.

निर्मला सीतारमण ने कहा कि "विकसित भारत-2047" का लक्ष्य बहुत दूर नहीं है, अभी 2026 चल रहा है और अब करीब 20 साल ही समय बचा है. एक बार जब हाई-पावर्ड कमिटी समीक्षा कर अपनी सिफारिशें तैयार कर लेगी, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में तेजी से कदम उठाना संभव हो सकेगा.

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सम्मेलन में मंथन के लिए छह थीमेटिक ट्रैक तय की गई हैं:-

  1. विषयगत क्षेत्र जमा जुटाने (Deposit Mobilization)
  2. युवाओं के लिए बैंकिंग (Banking for Youth)
  3. निवेश चक्र में सहयोग (Supporting the Investment Cycle)
  4. वैश्विक क्षमता केंद्रों की मदद (supporting Global Capability Centres)
  5. कृषि और बागवानी मूल्य श्रृंखला इंफ्रास्ट्रक्चर (Agriculture & Horticulture Value Chain Infrastructure)
  6. क्रेडिट कार्ड व्यवसाय की पुनर्कल्पना (Re-imagining the Credit Card Business) और प्राथमिकता क्षेत्र लेंडिंग (Priority Sector Lending).

पीएसबी सम्मेलन में 125 अधिकारी भाग ले रहे हैं, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और नाबार्ड, एक्जिम बैंक, सिडबी, एनएचबी, आईआईएफसीएल, आईएफसीआई और एनएबीएफआईडी जैसे सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक, साथ ही भारतीय बैंक संघ और वित्तीय सेवाएं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

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