Indian Railways Bedroll Service in Non-AC Coaches: रेलयात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. ट्रेनों के स्लीपर कोच में सफर करने वाले यात्रियों को भी अब एसी कोच वाले यात्रियों की तरह बेडरोल की सुविधा मिलेगी. जी हां! अब आप स्लीपर कोच में सफर करते हैं तो भी आपको बेडशीट यानी चादर (Bedsheet), तकिये (Pillow), पिलो कवर (Pillow Cover) वगैरह मिलेगा. बेडरोल पूरी तरह से स्वच्छ, सैनिटाइज्ड और रेडी-टू-यूज होगा. भारतीय रेलवे (Indian Railways) की ओर से ये अनूठी पहल बताई जा रही है, जिसे सोशल मीडिया पर यात्रियों की भी सराहना मिल रही है. अब तक केवल एसी कोच यानी थर्ड एसी (3AC), सेकेंड एसी (2AC) और फर्स्ट क्लास (First Class) में बेडरोल सेवा दी जाती रही है. अब नॉन-एसी कोचों (Non-AC Coaches) में भी ये सेवा दी जाएगी. हालांकि ये सेवा ऑन-डिमांड और ऑन-पेमेंट होगी. यानी यात्रियों की डिमांड पर निर्धारित भुगतान (Payment) करने पर बेडरोल दिया जाएगा.
कहां और कब से शुरू होगी ये सेवा?
स्लीपर क्लास में बेडरोल सर्विस फिलहाल दक्षिण भारत में शुरू होने वाली है. दक्षिण रेलवे के चेन्नई डिविजन ने स्लीपर क्लास के यात्रियों के लिए सफर को सुविधाजनक और आरामदायक बनाने के लिए ये कदम उठाया है. दक्षिण रेलवे ने बताया है कि चेन्नई डिवीजन के चुनिंदा ट्रेनों में 1 जनवरी 2026 से सैनिटाइज्ड, रेडी-टू-यूज बेडरोल ऑन-डिमांड-ऑन-पेमेंट सेवा शुरू करने की घोषणा की गई है.
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चेन्नई डिवीजन ने साल 2023-24 में न्यू इनोवेटिव नॉन-फेयर रिवेन्यू आइडियाज स्कीम (NINFRIS) के तहत स्लीपर क्लास के यात्रियों के लिए बेडरोल सर्विस की शुरुआत की थी. यात्रियों ने रेलवे की इस सेवा के प्रति उत्साह दिखाया. यात्रियों की ओर से मिले रेस्पॉन्स को देखते हुए दक्षिण रेलवे ने इसे स्थाई करने का फैसला लिया. रेलवे अब स्लीपर कोच में बेडरोल सर्विस को स्थाई नॉन-फेयर रेवेनयू सेवा के रूप में लागू करने जा रहा है.
बेडशीट, तकिये के कितने पैसे देने होंगे?
ट्रेनों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग सफर करते हैं, जिनके पास एसी कोच में सफर करने के या तो पैसे नहीं होते या फिर किसी मजबूरी और इमरजेंसी में उन्हें स्लीपर कोच में सफर करना पड़ता है. स्लीपर क्लास के यात्रियों को बेडरोल सुविधा नहीं मिलने के चलते उन्हें अपना बेडरोल ढोना पड़ता था, जिससे उनका लगेज भारी हो जाता है. अब उन्हें अपनी चादर, तकिये वगैरह नहीं ढोना होगा. ठंड में सफर करने पर वे पैसे देकर ओढ़ने और बिछाने के लिए चादर ले सकेंगे. कवर लगे तकिये भी ले सकेंगे. इन सेवाओं के लिए एक शुल्क तय किया गया है.
- एक बेडशीट: 20 रुपये
- एक तकिया और तकिया कवर: 30 रुपये
- बेडशीट, एक तकिया और तकिया कवर: 50 रुपये
किन 10 ट्रेनों में मिलेगी बेडरोल सर्विस?
स्लीपर क्लास में बेडरोल सेवा देने के लिए एक लाइसेंसधारी एजेंसी बेडरोल की खरीद, मशीन से धुलाई, पैकिंग, लोडिंग, डिस्ट्रिब्यूशन और स्टोरेज का पूरा प्रबंधन करेगी. तीन साल की अवधि के लिए ये सेवा रेलवे को 28,27,653 रुपये सालाना लाइसेंस शुल्क देगी. शुरुआती फेज में यह सुविधा चेन्नई डिविजन की 10 ट्रेनों में उपलब्ध होगी.
- नीलगिरि सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12671/12672|Nilgiri Superfast Express)
- मंगलूरू सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12685/12686|Mangalore Superfast Express)
- मनारगुड़ी एक्सप्रेस (16179/16180|Mannargudi Express)
- तिरुचेंदूर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20605/20606|Tiruchendur Superfast Express)
- पालघाट एक्सप्रेस (22651/22652|PalghatExpress)
- सिलंबु सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20681/20682| Silambu Superfast Express)
- तांबरम–नागरकोइल सुपरफास्ट (22657/22658|Tambaram–NagercoilSuperfast Express)
- तिरुवनंतपुरम सुपरफास्ट (12695/12696|Trivandrum Superfast Express)
- अलेप्पी सुपरफास्ट (22639/22640|Alleppey Superfast Express)
- मंगलूरू एक्सप्रेस (16159/16160|Mangalore Express)
स्लीपर कोच में बेडरोल सेवा शुरू होने से यात्रियों का सफर आरामदायक होगा. उनके लिए साफ और स्वच्छ बेडरोल सेवा पाना किफायती होगा. वहीं रेलवे के लिए भी ये सेवा अतिरिक्त राजस्व का स्रोत बनेगी.














