Indian Railways: रेलवे को RAC के लिए यात्री से पूरा किराया नहीं लेना चाहिए, संसदीय समिति ने कहा रिफंड के लिए नियम बनाना चाहिए

संसदीय समिति ने हाल ही में कहा कि RAC (Reservation Against Cancellation) टिकट पर पूरा किराया वसूलना ठीक नहीं है, क्योंकि इसमें यात्रियों को पक्की सीट नहीं मिलती और कई बार उन्हें बिना कन्फर्म बर्थ के सफर करना पड़ता है.

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रेलवे RAC बर्थ मिलने पर आंशिक किराया लौटाए
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RAC Ticket Rule: देश में लंबी दूरी के लिए किफायती सफर करना हो तो ट्रेन सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है. हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. यही वजह है कि ट्रेन में कंफर्म टिकट मिलना कई बार मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कई बार कंफर्म सीट नहीं मिलती और RAC  टिकट से ही सफर करना पड़ता है. RAC टिकट पर भी यात्रियों को पूरा किराया देना पड़ता है. ऐसे में एक संसदीय समिति ने हाल ही में कहा कि RAC (Reservation Against Cancellation) टिकट पर पूरा किराया वसूलना ठीक नहीं है, क्योंकि इसमें यात्रियों को पक्की सीट नहीं मिलती और कई बार उन्हें बिना कन्फर्म बर्थ के सफर करना पड़ता है.

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बुधवार को संसद में पेश की गई अपनी रिपोर्ट

“Punctuality and Travel Time in Train Operations in Indian Railways” में पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) ने कहा कि जिन यात्रियों को चार्ट बन जाने के बाद भी कन्फर्म बर्थ नहीं मिलती और वे RAC में ही यात्रा करते हैं, उनसे पूरा किराया नहीं लिया जाना चाहिए. समिति ने सुझाव दिया कि रेलवे मंत्रालय को ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें यात्रियों को कुछ किराया वापस मिल सके, खासकर उन लोगों को जिन्होंने पूरा किराया दिया, लेकिन उन्हें पूरी बर्थ नहीं मिली और उन्हें RAC की स्थिति में यात्रा करनी पड़ी.

मौजूदा नियमों के अनुसार, RAC टिकट बुक करने पर भी पूरा किराया लिया जाता है, लेकिन अगर चार्ट बनने के बाद भी टिकट RAC में ही रहता है, तो एक बर्थ पर दो यात्रियों को साथ बैठकर या लेटकर सफर करना पड़ता है, जबकि दोनों ने पूरा किराया दिया होता है. समिति ने रेलवे से कहा है कि ऐसे यात्रियों को आंशिक (partial) किराया वापस किया जाए और इस बारे में उठाए गए कदमों की सूचना संसद को दी जाए.

PAC ने भारतीय रेलवे में सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए तय मानकों पर भी सवाल उठाए. समिति ने बताया कि मई 2007 में रेलवे ने सुपरफास्ट ट्रेन की औसत गति का मानक तय किया था. जैसे- ब्रॉड गेज पर 55 kmph और मीटर गेज पर 45 kmph आदि. समिति का मानना है कि इन मानकों की अब फिर से समीक्षा की जानी चाहिए.

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