- दिल्ली में मकान या फ्लैट खरीदने से पहले डीएमसीडी और डीडीए के आधिकारिक पोर्टल से उसकी कानूनी स्थिति जांचें.
- प्रधानमंत्री अधिकृत कॉलोनी आवास योजना के तहत ही अवैध कॉलोनियों की संपत्तियों का पक्का मालिकाना हक मिलता है.
- प्रॉपर्टी खरीदने से पहले टाइटल डीड, चेन ऑफ डीड्स, एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट, म्यूटेशन रिकॉर्ड व नक्शा चेक करें.
देश की राजधानी दिल्ली में अपना सपनों का घर खरीदना हर किसी का सपना होता है. लेकिन उचित कानूनी जांच पड़ताल (Legal Due Diligence) न करने की वजह से कई लोग अवैध कॉलोनियों, सरकारी जमीनों पर बने मकानों या विवादित संपत्तियों में अपनी जिंदगी भर की कमाई गंवा बैठते हैं.
DDA के PMUDAY पोर्टल से कॉलोनी का स्टेटस चेक करें
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की PMUDAY यानी प्रधानमंत्री अधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना के तहत सिर्फ सरकार की ओर से अधिसूचित अनधिकृत कॉलोनियों में बने मकानों को ही पक्का मालिकाना हक दिया जाता है. लिहाजा, कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उस कॉलोनी का स्टेटस नीचे बताए गए तरीके से चेक कर सकते हैं कि जहां आप प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, वह कालोनी अवैध तो नहीं है.
ऑनलाइन प्रॉपर्टी की कानूनी स्थिति ऐसे करें चेक
- DDA के ऑफिसियल पीएमउदय पोर्टल पर जाएं या अपने मोबाइल में PMUDAY Android App डाउनलोड करें.
- वेबसाइट के होमपेज पर List of 1511 Unauthorized Colonies के लिंक पर क्लिक करें.
- सर्च बॉक्स में अपनी कॉलोनी का नाम या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें.
- अगर कॉलोनी का नाम इस लिस्ट में मौजूद है, तो वहां प्रॉपर्टी की पक्की रजिस्ट्री और मालिकाना हक संभव है.
- अगर नाम लिस्ट में नहीं है, तो वह जमीन फॉरेस्ट रिजर्व, एएसआई (ASI) संरक्षित क्षेत्र, डीडीए लैंड या यमुना खादर (O Zone) के अंतर्गत हो सकती है. ऐसी कॉलोनियां कभी भी रेगुलराइज्ड नहीं होतीं हैं.
- ऐप के UC Locator टूल में अपने स्मार्टफोन की जीपीएस लोकेशन ऑन करके क्लिक करें. यह टूल तुरंत दिखा देगा कि आपकी प्रॉपर्टी स्वीकृत कॉलोनी की सीमा के अंदर है या किसी प्रतिबंधित सरकारी जमीन पर.
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जरूर चेक करें ये 5 मुख्य कानूनी दस्तावेज
- प्रॉपर्टी खरीदने से पहले टाइटल डीड यानी संपत्ति के मालिकाना हक का दस्तावेज जरूर चेक करें कि ये सेलर के नाम पर है या नहीं?
- चेन ऑफ डीड्स यानी पहले से लेकर मौजूदा मालिक तक के सभी पुराने बैनामे या रजिस्ट्री का क्रमबद्ध रिकॉर्ड होना चाहिए.
- एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट यानी सब रजिस्ट्रार ऑफिस से जारी 15 से 30 साल का यह प्रमाण-पत्र दिखाता है कि संपत्ति पर कोई बैंक लोन, बंधक या कोर्ट केस तो नहीं है.
- म्यूटेशन रिकॉर्ड यानी स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी वर्तमान मालिक के नाम दर्ज है या नहीं.
- स्वीकृत नक्शा यामिनी मकान या बिल्डिंग का नक्शा एमसीडी से पास होना चाहिए और यह मास्टर प्लान के अनुसार रिहायशी श्रेणी में होना चाहिए.
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एमसीडी और सब रजिस्ट्रार ऑफिस से वेरिफिकेशन
एमसीडी के पोर्टल पर जाकर प्रॉपर्टी टैक्स की पुरानी रसीदें और ओनरशिप नेम मैच करें. अगर टैक्स जमा है और नाम सही है, तो संपत्ति कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है. इसके अलावा, संबंधित इलाके के सब रजिस्ट्रार दफ्तर में जाकर ओरिजिनल रजिस्ट्री रिकॉर्ड की जांच करें, ताकि किसी फर्जी या दोबारा बेची गई प्रॉपर्टी से बचा जा सके. वहीं, स्वीकृत बहुमंजिला इमारतों यानी फ्लैट्स के मामले में बिल्डर से ऑक्यूपेंसी या कंप्लीशन सर्टिफिकेट की मांग जरूर करें.
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