डीपफेक के खतरों से क्या AI ही बचाएगा, एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में तलाशा जाएगा जवाब

AI Impact Summit 2026: इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026 में इस बात पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा कि डीपफेक और AI से पैदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए खुद AI तकनीक कितनी सक्षम है.

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एआई इम्पैक्ट समिट 2026
file photo

AI Impact Summit 2026: भारत 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में AI Impact Summit 2026 की मेजबानी करेगा. इसे दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट्स में से एक माना जा रहा है. इस समिट में दुनिया भर के नेता, बड़ी कंपनियों के CEO, स्टार्टअप्स और शोधकर्ता शामिल होंगे. इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026 में इस बात पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा कि डीपफेक और AI से पैदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए खुद AI तकनीक कितनी सक्षम है.

AI की दुनिया के सबसे बड़े दिग्गज मिलेंगे बस यहां, 18 फरवरी को दिनभर.

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के हिसाब से सरकार टेक्नोलॉजी को सभी के लिए आसान बना रही है. फोकस दुनिया की समस्याओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डेवलपमेंट और इस्तेमाल को डेमोक्रेटाइज़ करने पर है, जिससे आखिरकार अलग-अलग सेक्टर में जिंदगी बेहतर होगी.

भारत के फाउंडेशनल मॉडल्स का डेवलपमेंट भारतीय डेटा सेट्स पर स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स या स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स डेवलप करना है. इस समिट में हेल्थकेयर, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, क्लाइमेट और गवर्नेंस पर चर्चा होगी. हालांकि, भारत के फाउंडेशन मॉडल्स बनाने के लिए अभी तक चार (4) स्टार्टअप्स, सर्वम AI, सोकेट AI, ज्ञानी AI और गण AI को चुना गया है. IndiaAI मिशन के तहत डेवलप किए गए मॉडल्स को ओपन सोर्स बनाया जाएगा, ताकि दूसरे स्टार्टअप्स को इसके ऊपर एप्लिकेशन्स, खासकर भारत के लिए खास एप्लिकेशन्स बनाने में मदद मिल सके.

AI के खिलाफ AI

17 फरवरी को एक विशेष सत्र आयोजित किया गया है, जिसका शीर्षक है "सुरक्षित भारत के लिए एआई: एआई-सक्षम साइबर अपराध, डीपफेक और डार्कवेब खतरों का मुकाबला".  इसमें विशेषज्ञ इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कैसे AI टूल्स का उपयोग करके ही डीपफेक की पहचान की जा सकती है.

टेक्नो-लीगल दृष्टिकोण

भारत सरकार एक ऐसा फ्रेमवर्क बना रही है, जिसमें कानूनी नियमों के साथ-साथ तकनीकी समाधान जैसे IITs में विकसित किए जा रहे डीपफेक डिटेक्शन टूल्स को भी शामिल किया गया है.

लेबलिंग और वाटरमार्किंग

सरकार की नई गाइडलाइंस के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए AI से बनी सामग्री पर 'परमानेंट मेटाडेटा' या 'डिजिटल लेबल' लगाना अनिवार्य किया जा रहा है, ताकि उनकी पहचान आसानी से हो सके.

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