ओटीटी की दुनिया पर वेब सीरीज की भरमार है. रोज कोई ना कोई सीरीज आती है और सुर्खियां बटोरती है. लेकिन हम यहां आपके साथ 38 साल पुरानी उस सीरीज की बात करने जा रहे हैं जो दूरदर्शन पर आई थी और कई विवादों को जन्म दिया. इसके साथ ही इसने भारत विभाजन की त्रासदी को दिखाकर रूह को कंपा दिया. ये चार घंटे 57 मिनट की फिल्म के तौर पर यूट्यूब पर मौजूद है. लेकिन दूरदर्शन पर इसे छह एपिसोड में प्रसारित किया गया था. हम बात कर रहे हैं हिंदी साहित्य के मशहूर उपन्यासकार भीष्म साहनी के उपन्यास 'तमस' की. आइए जानते हैं इसके डिटेल्स और सीरीज को लेकर खास बातें.
हिंदी उपन्यास तमस
'तमस' हिंदी उपन्यास है जिसे भीष्म साहनी ने 1974 में लिखा था. भीष्म साहनी रावलपिंडी में पैदा हुए थे और विभाजन के गवाह थे. उन्होंने अपनी आत्मकथा 'आज के अतीत' में बताया कि 1947 की हिंसा ने उन्हें यह उपन्यास लिखने के लिए प्रेरित किया. उपन्यास ने 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता.
यहां देखें तमस
तमस की कहानी
कहानी 1947 के विभाजन से पहले एक शहर की है. यह दंगों की जड़ों को खोजती है: एक गरीब नत्थू (ओम पुरी) को पैसे के लालच में एक सुअर मारने के लिए कहा जाता है, जिसे मस्जिद के पास फेंक दिया जाता है. इससे सांप्रदायिक तनाव भड़कता है और दंगे शुरू हो जाते हैं. उपन्यास कई परिवारों की कहानियां बुनता है, जहां हिंसा के बीच मानवीयता के उदाहरण भी दिखते हैं. इस उपन्यास में संस्थागत हिंसा, धार्मिक पहचान, सांप्रदायिक राजनीति और महिलाओं पर हमले शामिल हैं.
तमस टीवी सीरीज
1988 में गोविंद निहलानी ने उपन्यास पर आधारित 6 एपिसोड की टीवी सीरीज बनाई, जो बाद में 4 घंटे 57 मिनट की फिल्म के रूप में यूट्यूब पर रिलीज हुई. यह दूरदर्शन पर प्रसारित हुई और इसने तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते. शो को साल 1988 के नेशनल अवॉर्ड के तहत नरगिस दत्त अवॉर्ड फॉर बेस्ट फीचर फिल्म ऑन नेशनल इंटीग्रेशन का अवॉर्ड मिला. शो की एक्ट्रेस सुरेखा सीकरी ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का खिताब जीता और वनराज भाटिया ने बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन के लिए अवॉर्ड हासिल किया. इसमें ओम पुरी, दीपा साही, अमरीश पुरी, पंकज कपूर और खुद भीष्म साहनी भी नजर आए थे.
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