90 का दशक भारतीय टेलीविजन का वो सुनहरा दौर था जब मनोरंजन का मतलब सिर्फ एक टीवी सेट और उसके सामने बैठा पूरा परिवार होता था. रात के खाने के बाद लोग टाइम से अपने काम निपटा लेते थे ताकि ताकि पसंदीदा सीरियल मिस न हो जाए. उस समय कहानियों में सादगी थी, किरदारों में अपनापन था और हर शो दिल में जगह बना लेता था. फैंटेसी, जादू और रोमांच से भरे ऐसे ही शो में एक नाम था अलिफ लैला, जिसने बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको अपनी जादुई दुनिया का दीवाना बना दिया था.
जादुई कहानियों का खजाना बना अलिफ लैला
शक्तिमान, चंद्रकांता और विक्रम बेताल की तरह ही ‘अलिफ लैला' भी उस दौर का सुपरहिट शो था. 1993 में प्रसारित हुए इस सीरियल ने अरेबियन नाइट्स की कहानियों को भारतीय अंदाज में पेश किया. महल, जादू, तिलिस्म, उड़ते कालीन और रहस्यमयी किरदार… हर एपिसोड किसी नई दुनिया का दरवाजा खोल देता था. इस शो को लिखा और डायरेक्ट किया था रामानंद सागर ने, जबकि प्रोडक्शन की जिम्मेदारी संभाली थी संजय खान ने.
सबसे ज्यादा याद किया गया किरदार- जिन
कहानी में कई राजकुमार, जादूगर और खलनायक थे, लेकिन असली स्टार था जिन. जैसे ही स्क्रीन पर धुआं उठता और भारी आवाज गूंजती, बच्चों की धड़कनें तेज हो जाती थीं...जिन की एंट्री मतलब मजा डबल. उसका अंदाज, ताकत और हाजिरजवाबी दर्शकों को तुरंत बांध लेती थी.
कौन हैं जिन का किरदार निभाने वाले एक्टर?
इस दमदार रोल को निभाया था दयाल सिंह कश्यप ने. हरियाणा के करनाल से ताल्लुक रखने वाले दयाल सिंह पेशे से पहलवान थे. उनकी लंबी हाइट, मजबूत कद-काठी और गूंजती आवाज ने उन्हें इस किरदार के लिए परफेक्ट बना दिया. बताया जाता है कि उन्होंने ‘अलिफ लैला' के लिए ऑडिशन दिया और पहली ही नजर में मेकर्स को पसंद आ गए. बस यहीं से उनकी किस्मत बदल गई जिन बनकर वो घर-घर में मशहूर हो गए.
जिन से विलेन तक का सफर
इस शो की सफलता के बाद दयाल सिंह कश्यप को फिल्मों और टीवी में ज्यादातर विलेन के रोल मिलने लगे. उनका रौबदार लुक निगेटिव किरदारों में खूब जंचता था. उन्होंने हिंदी के साथ-साथ पंजाबी सिनेमा में भी काम किया. हालांकि समय के साथ बड़े रोल कम होते गए, लेकिन उनकी पहचान आज भी उसी जिन वाले किरदार से जुड़ी हुई है.
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