Pune में एक हैरान करने वाला लेकिन सीख देने वाला मामला सामने आया है. यहां 81 साल के एक बुजुर्ग पिता ने अपनी सूझबूझ से अपने बेटे और बहू को 12 लाख रुपये की साइबर ठगी से बचा लिया. यह ठगी 'डिजिटल अरेस्ट' नाम के नए तरीके से की जा रही थी, जिसमें लोगों को डराकर पैसे ऐंठे जाते हैं. इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर आप सतर्क रहें और सही समय पर समझदारी दिखाएं, तो बड़े से बड़ा फ्रॉड टल सकता है.
कैसे शुरू हुआ पूरा स्कैम
यह घटना 19 अप्रैल की सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई, जब बेटे को WhatsApp पर एक अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को Mumbai Police Crime Branch का अधिकारी बताया. उसने कहा कि एक पार्सल, जो बेटे के नाम पर था, पकड़ा गया है और उसमें पांच पासपोर्ट और ड्रग्स जैसी अवैध चीजें मिली हैं. यह सुनकर बेटा और उसकी पत्नी घबरा गए, हालांकि उन्होंने तुरंत कहा कि यह पार्सल उनका नहीं है.
झूठे आरोप और डराने की चाल
ठग ने इसके बाद और गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए और कहा कि अब इस मामले में हाई-लेवल जांच होगी. डर का माहौल बनाने के लिए उसने दोनों को लगातार धमकाया और उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश की कि वे बड़ी मुसीबत में फंस चुके हैं. यह सब सुनकर कोई भी आम इंसान घबरा सकता है, और यही ठगों की सबसे बड़ी चाल होती है.
Signal ऐप के जरिए जाल में फंसाना
इसके बाद ठगों ने दोनों को Signal ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा और वीडियो कॉल पर आने को मजबूर किया. वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया, जिसने खुद को जांच अधिकारी बताया. उसने सख्ती से कहा कि इस मामले के बारे में किसी को कुछ न बताया जाए. इस तरह दोनों को उनके ही घर में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा माहौल बनाकर कैद कर लिया गया.
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रात तक चला मानसिक दबाव
यह पूरा ड्रामा रात तक चलता रहा. ठग बार-बार आरोप लगाते रहे और डराने की कोशिश करते रहे. आखिर में उन्होंने आधार कार्ड और बैंक डिटेल्स मांगीं. फिर उन्होंने कहा कि अगर 12 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएं, तो नाम इस केस से हटा दिया जाएगा. यह वह पल था जब मामला बेहद गंभीर हो चुका था.
इसी दौरान बेटे के चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था. यह देखकर 81 साल के पिता ने उससे बात की और पूरा मामला समझा. उन्होंने तुरंत पहचान लिया कि यह एक साइबर ठगी है. उन्होंने बेटे को समझाया कि कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी इस तरह फोन या वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई चीज नहीं होती.
पिता की सलाह मानते हुए बेटे ने तुरंत पैसे ट्रांसफर करने से मना कर दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई. इस तरह परिवार 12 लाख रुपये के बड़े नुकसान से बच गया. अगर थोड़ी भी देर होती, तो यह रकम ठगों के हाथ में चली जाती.
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से कैसे बचें?
आज के समय में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए जागरूक रहना बहुत जरूरी है. अगर कोई आपको फोन करके गिरफ्तारी की धमकी देता है, तो घबराएं नहीं और तुरंत कॉल काट दें. कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करें, चाहे वह खुद को पुलिस या अधिकारी ही क्यों न बताए. अपनी बैंक डिटेल्स, आधार नंबर या कोई भी निजी जानकारी किसी के साथ शेयर न करें. सबसे जरूरी बात यह है कि पुलिस कभी भी फोन या वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी नहीं करती. अगर ऐसा कोई कॉल आए, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत करें.














