फोन टैपिंग मामला: एसआईटी ने पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को नोटिस भेजा

तेलंगाना में फोन टैपिंग मामले की जांच कर रही एसआईटी ने बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है, हालांकि केसीआर ने नई तारीख तय करने का अनुरोध किया.

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  • तेलंगाना पुलिस के विशेष जांच दल ने पूर्व CM चंद्रशेखर राव को फोन टैपिंग मामले में पूछताछ के लिए नोटिस जारी
  • चंद्रशेखर राव ने उम्र के कारण पूछताछ के लिए किसी अन्य सुविधाजनक स्थान पर तिथि निर्धारण का अनुरोध किया है
  • बीआरएस प्रमुख ने कहा कि वे निकाय चुनाव में व्यस्त हैं और जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है
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हैदराबाद:

तेलंगाना में पूर्ववर्ती भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार के कार्यकाल में फोन टैपिंग के आरोपों की जांच कर रहे राज्य पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 30 जनवरी को पूछताछ के लिए पेश होने के वास्ते बृहस्पतिवार को बीआरएस प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को नोटिस जारी किया. हालांकि, राव ने अनुरोध किया कि उनके पूछताछ के लिए पेश होने के वास्ते नयी तिथि निर्धारित की जाए. राव को केसीआर नाम से भी जाना जाता है और उन्होंने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे.

एसआईटी ने राव से 30 जनवरी को दोपहर तीन बजे यहां उसके समक्ष पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है. नोटिस में एसआईटी ने कहा है कि चूंकि, केसीआर की उम्र 65 साल से अधिक है, इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-160 के तहत वह या तो जुबली हिल्स पुलिस थाने में जांचकर्ताओं के समक्ष पेश हो सकते हैं या हैदराबाद में अपने लिए किसी सुविधाजनक स्थान की जानकारी दे सकते हैं, जहां उनसे पूछताछ की जा सके.

केसीआर से यह भी अनुरोध किया गया कि वह पूछताछ के लिए अपनी पसंदीदा जगह की जानकारी “समय से पहले” दे दें. बीआरएस प्रमुख ने अपने जवाब में, जांच अधिकारी को सूचित किया कि वह 11 फरवरी को होने वाले निकाय चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया में व्यस्त हैं, क्योंकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 जनवरी है. केसीआर ने कहा कि जांच अधिकारी पूछताछ के लिए कोई अन्य तिथि निर्धारित कर सकते हैं.

केसीआर ने सीआरपीसी की धारा-160 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि 65 साल से अधिक उम्र के किसी भी पुरुष को पुलिस थाने जाने की आवश्यकता नहीं है और जांच दल को ऐसे व्यक्तियों से उनके निवास स्थान पर ही पूछताछ करनी होगी. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसलिए सीआरपीसी की धारा-160 के अनुसार, पूर्व सूचना के बाद उनसे उनके एर्रावल्ली गांव स्थित पते पर पूछताछ की जा सकती है.

केसीआर ने कहा, “मैं यह निवेदन करता हूं कि तेलंगाना राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में विधानसभा में विपक्ष के नेता होने के नाते और इस देश के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में, मैं उक्त जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन देना चाहता हूं.” केसीआर के बेटे एवं बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने अपने पिता को जारी किए गए नोटिस को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह “प्रतिशोध की सबसे घृणित राजनीति” का एक उदाहरण है.

रामाराव ने आरोप लगाया कि यह नोटिस कांग्रेस सरकार द्वारा अपनी विफलताओं और शासन में खामियों से ध्यान हटाने का एक प्रयास है. उन्होंने कहा, “यह कोई जांच नहीं है... यह प्रतिशोध है. यह न्याय नहीं है... यह राजनीतिक द्वेष है.” रामाराव ने एक विज्ञप्ति में कहा कि बीआरएस प्रतिशोध की राजनीति की निंदा करती है और जनता कांग्रेस को सबक सिखाएगी.

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तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी महेश कुमार गौड़ ने कहा कि इस मामले में राजनीतिक बदले की कोई भावना नहीं है और कांग्रेस के राज्य में सत्ता में आए ढाई साल बीत चुके हैं. उन्होंने कहा कि फोन टैपिंग के आरोपों की गहन जांच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए. केसीआर की बेटी के कविता ने आरोप लगाया कि फोन टैपिंग की जांच “गंभीरता से नहीं” की जा रही है.

कविता को बीआरएस से निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने दावा किया कि नगर निकाय चुनाव को देखते हुए केसीआर को नोटिस जारी किया गया है और यह देखना होगा कि दोषियों को सजा मिलेगी या नहीं. इससे पहले, बीआरएस के कार्यकारी रामाराव 23 जनवरी को तथा पार्टी के वरिष्ठ विधायक टी हरीश राव 20 जनवरी को इस मामले में एसआईटी के समक्ष पेश हो चुके हैं.

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इसके अलावा, बीआरएस के कुछ अन्य नेताओं को भी हाल के दिनों में एसआईटी ने तलब कर उनसे पूछताछ की है. पुलिस के अनुसार, यह मामला नेताओं, व्यापारियों, पत्रकारों, न्यायपालिका के सदस्यों और अन्य जाने-माने लोगों की फोन कॉल पर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनधिकृत और अवैध तरीके से नजर रखने के आरोपों से जुड़ा हआ है.

मामले के मुख्य आरोपी टी प्रभाकर राव से एसआईटी पहले ही पूछताछ कर चुकी है. हैदराबाद पुलिस ने तेलंगाना विशेष आसूचना ब्यूरो (एसआईबी) के एक निलंबित डीएसपी सहित चार पुलिस अधिकारियों को मार्च 2024 में विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खुफिया जानकारी कथित तौर पर मिटाने और बीआरएस के कार्यकाल में फोन टैपिंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. बाद में सभी को जमानत मिल गई थी.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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