पिता वीरमनाथ ने ही... साध्वी प्रेम बाईसा की इंस्टा ID से पोस्ट करने वाले शख्स का चौंकाने वाला खुलासा

राजस्थान के बहुचर्चित साध्वी प्रेम बाईसा संदिग्ध मौत मामले में एक नया मोड़ आया है. साध्वी के सोशल मीडिया अकाउंट्स संभालने वाले भोमाराम ने एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कई ऐसे खुलासे किए हैं, जो अब तक की थ्योरी को चुनौती दे रहे हैं.

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  • साध्वी प्रेम बाईसा के सोशल मीडिया पोस्ट पिता विरमनाथ के निर्देश पर ही डाले गए थे, भोमाराम ने बताया
  • भोमाराम ने बताया कि साध्वी की तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल पहुंचने तक उनका निधन हो चुका था
  • गुरु महाराज ने रात को पोस्टमार्टम न कराने का तर्क दिया कि रात में पोस्टमार्टम संभव नहीं होता है
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राजस्थान के बहुचर्चित साध्वी प्रेम बाईसा संदिग्ध मौत मामले में एक नया मोड़ आया है. साध्वी के सोशल मीडिया अकाउंट्स संभालने वाले भोमाराम ने एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कई ऐसे खुलासे किए हैं, जो अब तक की थ्योरी को चुनौती दे रहे हैं. भोमाराम ने सीधे तौर पर बताया है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किसके कहने पर की जा रही थीं और अस्पताल में मौत के बाद क्या परिस्थितियां बनी थीं. भोमाराम ने घटना वाले दिन की आपबीती सुनाते हुए बताया- वे दिल्ली जाने के लिए निकले थे, तभी झालामंड के पास गुरुदेव के फोन से सेवादार सुरेश का कॉल आया. उन्हें बताया गया कि बाईसा की तबीयत खराब है. पूछने पर बताया गया कि प्रेक्षा हॉस्पिटल पहुंचना है. भोमाराम जब तक अस्पताल पहुंचे, तब तक साध्वी प्रेम बाईसा का निधन हो चुका था. 


"पिता विरमनाथ के कहने पर डाली गई थीं पोस्ट"

भोमाराम ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जो भी दावे या पोस्ट किए गए, वे उनके निजी विचार नहीं थे. उन्होंने बताया कि साध्वी के पिता विरमनाथ के निर्देश पर ही सारी पोस्ट डाली गई थीं. भोमाराम के अनुसार, प्रेम बाईसा ने चारों शंकराचार्यों को पत्र लिखकर कहा था कि वह बचपन से ब्रह्मचर्य का पालन कर रही हैं और किसी भी तरह की 'अग्नि परीक्षा' देने को तैयार हैं. यह पोस्ट भी पिता के कहने पर ही पब्लिश की गई थी.

"रात को पोस्टमार्टम न कराने के पीछे गुरु महाराज का तर्क"

आश्रम पर हुए हंगामे और पोस्टमार्टम में देरी के आरोपों पर भोमाराम ने गुरु महाराज का पक्ष रखा. उन्होंने कहा, "गुरु महाराज का इरादा पोस्टमार्टम रोकने का नहीं था. उनका तर्क था कि रात के समय पोस्टमार्टम संभव नहीं होता, इसलिए योजना सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सरकारी अस्पताल ले जाने की थी. इसके लिए विधिवत साधु-संतों को सूचना दी जा रही थी.


साजिश और हंगामे का आरोप

भोमाराम ने उन लोगों पर सवाल उठाए जिन्होंने उस रात हंगामा किया था। उन्होंने कहा,  कुछ लोग केवल राजनीति करने के लिए माहौल खराब कर रहे थे. हंगामे के दौरान गुरु महाराज की गाड़ी के टायर की हवा निकाल दी गई और गाड़ी तोड़ने का प्रयास किया गया. भोमाराम ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग उस रात हंगामा कर रहे थे, वे न तो साध्वी की समाधि के समय दिखे और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुए. 


अब फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार

हालांकि भोमाराम के बयानों ने कई कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की है, लेकिन साध्वी की मौत की असली वजह अभी भी रहस्य बनी हुई है. पुलिस और परिजनों को अब फोरेंसिक रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है, जिसके बाद ही मौत के सही कारणों का आधिकारिक खुलासा हो सकेगा.
 

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