- हरदीप सिंह नामक युवक हनुमानगढ़ से पाकिस्तान में रहने वाली प्रेमिका के लिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करता था
- राबिया और उसका परिवार पाकिस्तान में एक साइबर ठगी का कॉल सेंटर चलाते हैं जो भारतीय नंबरों का जाल बुनता है
- हरदीप ने स्थानीय मजदूरों के बैंक खाते किराए पर लेकर ठगी का पैसा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पाकिस्तान भेजा करता था
आपने अक्सर सीमा पार की प्रेम कहानियों के बारे में सुना होगा, लेकिन राजस्थान के हनुमानगढ़ से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. यहां 'इश्क' का रास्ता सीधा साइबर क्राइम और देश विरोधी गतिविधियों की संदिग्ध गलियों से होकर गुजर रहा है. पुलिस ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है जो पाकिस्तान में बैठी अपनी 'प्रेमिका' के लिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी कर रहा था.
राबिया के प्यार में 'साइबर ठग' बना हरदीप
हनुमानगढ़ साइबर थाना पुलिस की गिरफ्त में आया हरदीप सिंह (निवासी डबलीराठान) महज 12वीं पास है, लेकिन उसके कारनामे अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं. करीब दो साल पहले एक फ्रॉड कॉल के जरिए हरदीप का संपर्क पाकिस्तान की राबिया से हुआ. बातचीत का सिलसिला बढ़ा और हरदीप राबिया के प्यार में इस कदर पागल हुआ कि उसने देश के ही लोगों को लूटने का धंधा शुरू कर दिया.
कैसे काम करता था यह 'सिंडिकेट'?
पुलिस जांच में सामने आया कि राबिया और उसका पूरा परिवार पाकिस्तान में एक साइबर ठगी का कॉल सेंटर चलाता है. इस गिरोह का मॉडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका) बेहद शातिर था.
भारतीय नंबरों का जाल
हरदीप ने राबिया को भारतीय सिम कार्ड और व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध कराए. भारतीय नंबर देखकर लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे. पाकिस्तानी ठग सोशल मीडिया पर 'हर्ष साई फाउंडेशन' जैसे फर्जी एनजीओ, सस्ता सामान और लोन के विज्ञापन दिखाकर लोगों को फंसाते थे. हरदीप अपने गांव के अनपढ़ और भोले-भाले मजदूरों को लालच देकर उनके बैंक खाते किराए पर लेता था. अब तक ऐसे 100 से ज्यादा शिकार सामने आए हैं. ठगी का पैसा भारतीय खातों में आता था, जिसे हरदीप अपना 15% कमीशन काटकर बाकी रकम USDT (क्रिप्टोकरंसी) के जरिए पाकिस्तान भेज देता था.
3.26 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन और 14 राज्यों में कनेक्शन
एसपी हरि शंकर के अनुसार, हरदीप के जरिए अब तक करीब 3.26 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुआ है. आरोपी के खिलाफ देश के 14 राज्यों में 36 शिकायतें दर्ज हैं. पुलिस ने उसके पास से भारी मात्रा में दस्तावेज बरामद किए हैं. 26 बैंक पासबुक और 8 चेकबुक, 18 एटीएम कार्ड और 8 सिम कार्ड, पाकिस्तान से संबंधित दस्तावेज और 3 मोबाइल फोन.
पुलिस जांच अधिकारी के मुताबिक, आरोपी पाकिस्तान जाने के लिए इतना बेताब था कि उसने वीजा के लिए अप्लाई भी किया था, लेकिन सफल नहीं हो सका."
क्या टेरर फंडिंग से जुड़े हैं तार?
इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों (IB और अन्य) को भी सतर्क कर दिया है. हालांकि शुरुआती पूछताछ में जासूसी का एंगल सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस को शक है कि साइबर ठगी से कमाया गया यह मोटा पैसा आतंकवाद (Terror Funding) में इस्तेमाल हो सकता है. फिलहाल पुलिस 'ऑपरेशन साइबर क्लीन' के तहत इस नेटवर्क की गहराई तक जाने में जुटी है.














