पांचना बांध का 20 साल पुराना विवाद सुलझा, 7 दिन में छोड़ा जाएगा नहरों में पानी; लिफ्ट के लिए 50 करोड़ मंजूर

राजस्थान के करौली में पांचना बांध का 20 साल पुराना जल विवाद समाप्त हो गया है. सरकार के मंत्रियों की पहल पर गुर्जर और मीणा समाज के बीच सहमति बनी है. सरकार ने लिफ्ट परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया है.

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राजस्थान के करौली में पांचना बांध का 20 साल पुराना जल विवाद समाप्त हो गया है.
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Pachna Dispute Resolved: राजस्थान में करौली जिले के बहुचर्चित पांचना बांध को लेकर पिछले दो दशकों से चला आ रहा जल विवाद अब समाप्त हो गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल हस्तक्षेप और उनकी टीम की सक्रियता से गुर्जर और मीणा समाज के बीच आम सहमति बन गई है. इस ऐतिहासिक समझौते के बाद क्षेत्र में वर्षों से जारी तनाव अब खुशहाली में बदलने की उम्मीद है.

सरकार और समुदायों में बनी सर्वसम्मति

इस विवाद को हल करने के लिए राज्य सरकार ने पूरी गंभीरता दिखाई. जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने शिक्षा संकुल में दोनों पक्षों के साथ लंबी बातचीत की. सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगले 7 दिनों के भीतर जल संसाधन विभाग पानी छोड़ने का एक व्यवस्थित शेड्यूल तैयार करेगा. इस निर्णय से दोनों समुदायों ने संतोष व्यक्त किया है और मुख्यमंत्री का आभार जताया है.

मंत्री ने बताया कि कमांड क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए लिफ्ट परियोजना को भी आगे बढ़ाया जाएगा. इसके अलावा स्थानीय लोगों की लंबे समय से लंबित बांध में सुधार कार्य की मांग को भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंजूरी के बाद पूरा किया जाएगा.

लिफ्ट परियोजना और बुनियादी ढांचे का विकास

सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने बड़ी घोषणा की है. पांचना बांध क्षेत्र में लिफ्ट परियोजना शुरू करने के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया जा चुका है. इसका कार्य जल्द ही शुरू होगा, जिससे स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा.

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इसके बाद कमांड क्षेत्र के किसानों और मीणा समाज के प्रतिनिधियों के साथ अलग दौर की वार्ता हुई. इसमें कमांड क्षेत्र में  छोड़ने की व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी. इसके बाद पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया.

क्या था यह दशकों पुराना विवाद?

दरअसल, पांचना बांध का जल विवाद मुख्य रूप से बांध के कमांड एरिया और पानी के बंटवारे को लेकर था. गुर्जर और मीणा समाज के बीच दशकों से इस बात पर मतभेद थे कि बांध का पानी किन क्षेत्रों और किन-किन गांवों की सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाए. यह मामला लंबे समय से अदालतों और धरने-प्रदर्शनों के बीच फंसा हुआ था. कोर्ट के फैसलों और आपसी अविश्वास के कारण किसान लगातार संघर्ष कर रहे थे. अब सरकार की मध्यस्थता से बने फॉर्मूले ने न केवल पानी के वितरण का रास्ता साफ किया है बल्कि दोनों समुदायों के बीच भाईचारे की नई मिसाल भी कायम की है.

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