Rajasthan News: राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर के निवासियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अब थार के रेगिस्तान में भीषण गर्मी और नहरबंदी के दौरान पानी का संकट इतिहास बनने जा रहा है. जैसलमेर में एशिया की सबसे बड़ी पानी की डिग्गी (मेगा रिजर्वायर) बनकर तैयार हो गई है, जिसे थार का 'जल कवच' कहा जा रहा है.
नहरबंदी का स्थायी समाधान
हर साल मार्च से मई के बीच इंदिरा गांधी नहर में मरम्मत कार्य के चलते पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाती है, जिससे सीमावर्ती जिलों जैसलमेर और बाड़मेर में हाहाकार मच जाता है. 242 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह परियोजना इसी समस्या का एक स्थायी समाधान है.
यह विशाल जलाशय मोहनगढ़ के पास 1356 आरडी पर स्थित है. इसकी भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी परिधि 28 किलोमीटर है और गहराई 10 मीटर है. दूर से देखने पर यह रेगिस्तान के बीच किसी विशाल समुद्र जैसा प्रतीत होता है.
आधुनिक तकनीक का कमाल
इस परियोजना में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती पानी को जमीन में रिसने से रोकना था. इसके लिए पूरे जलाशय के बेस में 300 माइक्रोन की विशेष प्लास्टिक शीट बिछाई गई है, जो पानी को पूरी तरह सुरक्षित रखती है. जलाशय को मोहनगढ़ स्थित जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य सिस्टम से जोड़ा गया है. यहाँ से पानी को फिल्टर प्लांट तक पहुँचाने के लिए चार बड़े हैवी-ड्यूटी पाइप बिछाए गए हैं.
कैसे काम करेगा यह जल स्रोत
विभाग ने इस रिजर्वायर को भरने के लिए एक खास रणनीति बनाई है. मानसून के दौरान जब पंजाब से इंदिरा गांधी नहर में अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है, तब इस जलाशय को लबालब भरा जाएगा. इसके बाद साल भर जब भी नहरबंदी होगी, इस स्टॉक किए गए पानी से जैसलमेर और बाड़मेर की प्यास बुझाई जाएगी. 9 जुलाई को मुख्यमंत्री द्वारा इस महत्वपूर्ण परियोजना का उद्घाटन संभावित है. यह न केवल लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित होगा बल्कि रेगिस्तान में विकास की नई धारा भी बहाएगा.
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