केंद्रीय मंत्री को इस्ताफा देना चाहिए.... एपस्टीन फाइल विवाद पर AAP नेता अनुराग ढांडा ने की मांग

AAP मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनुराग ढांडा ने कहा कि किसी मंत्री ने पहली बार खुले रूप से स्वीकार किया है कि एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकात हुई.लेकिन उन्होंने पूरा सच नहीं बताया.केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि वह प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में ही जेफरी एपस्टीन से मिले थे और उनकी कभी अकेले या व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई.जबकि ऐसा नहीं है.

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आम आदमी पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के एपस्टीन से प्रतिनिधि मंडल के साथ मुलाकात करने के दावे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया है कि एपस्टीन से हरदीप सिंह पुरी डेलिगेशन के साथ नहीं, बल्कि एक नेता के तौर पर अकेले मिले थे. अनुराग का आरोप है कि दोनों के बीच हुई बातों से साफ है कि वे एक-दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं.ऐसे में प्रतिनिधिमंडल के साथ एपस्टीन से मिलने का उनका दावा झूठा है. ऐसे में उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

गुरुवार को AAP मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनुराग ढांडा ने कहा कि किसी मंत्री ने पहली बार खुले रूप से स्वीकार किया है कि एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकात हुई.लेकिन उन्होंने पूरा सच नहीं बताया.केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि वह प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में ही जेफरी एपस्टीन से मिले थे और उनकी कभी अकेले या व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई.जबकि ऐसा नहीं है. अनुराग ढांडा ने कहा कि यह बैठक मोदी सरकार के बनने के बाद हुई. हरदीप पुरी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने निजी हित के लिए बात कर रहे थे या मोदी सरकार के लिए.

अनुराग ढांडा ने आगे कहा कि इन बैठकों को लेकर सारे दस्तावेज अमेरिकी न्याय प्रणाली द्वारा जारी किए गए हैं और पूरी तरह प्रामाणिक हैं. हरदीप पुरी पुष्टि कर रहे हैं कि मई 2017 में वह एपस्टीन से मिले. 19 मई 2017 को यह बैठक हुई. उधर, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने गुरुवार को एपस्टीन फाइल में नाम आने के बारे में और डिटेल से बात रखी.उन्होंने बताया कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें उस वक्त हुई थीं, जब वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के एक प्रोजेक्ट इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म (ICM) के महासचिव थे, जिसमें दुनिया भर के कई प्रतिष्ठित नेता और प्रधानमंत्री शामिल थे. 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एपस्टीन उस कमीशन का हिस्सा नहीं था बल्कि आईजीआई के कार्यक्रमों के सिलसिले में ही मौजूद रहता था. पुरी ने कहा कि अगर मैं कोई सरकारी अधिकारी होता तो मैं किसी को मैसेज भेजकर पूछता कि क्या मुझे इस व्यक्ति से मिलना चाहिए या नहीं, लेकिन ऐसा नहीं था. 

हरदीप पुरी ने कहा कि ये मुलाकात पर्सनल नहीं बल्कि डेलिगेशन के साथ हुई थीं. उन्होंने बताया कि वह प्रतिनिधिमंडल के साथ एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे. इससे पहले बुधवार को प्रेस कॉफ्रेंस में हरदीप पुरी ने कहा -एपस्टीन फाइल के नाम पर 30 लाख ईमेल जारी किए जा चुके हैं. मैं मई 2009 से जब मैंने संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला, आठ साल तक न्यूयॉर्क में रहा. 2017 में मैं मंत्री बना. आठ वर्षों में संभवतः तीन या चार मुलाकातों का जिक्र है.

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