पंजाब के पूर्व मंत्री भुल्लर पर FIR का मामला, केजरीवाल बोले- ‘हमने तुरंत कार्रवाई कर गिरफ्तार करवाया’

पंजाब वेयरहाउसिंग अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है. मरने से पहले बनाए गए 12 सेकंड के वीडियो में उन्होंने पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के डर और दबाव का आरोप लगाया.

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  • पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के गगनदीप सिंह ने पूर्व मंत्री भुल्लर के दबाव के कारण आत्महत्या की.
  • रंधावा ने अपने मोबाइल पर वीडियो रिकॉर्ड कर कहा कि लालजीत भुल्लर के डर से उन्होंने सल्फास खाया है.
  • आरोप है कि मंत्री ने रंधावा से अपने पिता के नाम पर गलत टेंडर पास कराने का दबाव बनाया था.
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Laljit Bhullar controversy: पंजाब में वेयरहाउसिंग अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या से जुड़े केस में बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने ही मंत्री पर लगे गंभीर आरोपों पर बिना देरी और भेदभाव के कार्रवाई की. उन्हें पद से हटाया गया और गिरफ्तार भी करवाया गया. इस पर बीजेपी और AAP के बीच तकरार और तेज हो गई है.

केजरीवाल का बयान: ‘इंसाफ के लिए सख्त कदम'

केजरीवाल ने कहा कि जब एक मंत्री पर गंभीर आरोप लगे, तो सरकार ने तुरंत कार्रवाई की. उनके मुताबिक, AAP कानून को पहले रखती है, इसलिए पद से हटाने के साथ गिरफ्तारी की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई. उन्होंने इसे “न्याय के प्रति प्रतिबद्धता” बताया.

बीजेपी पर साधा निशाना

केजरीवाल ने हरियाणा के एक ADGP आत्महत्या मामले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां गंभीर आरोपों के बावजूद सरकार और पार्टी दोषियों के समर्थन में खड़ी दिखी. उनके अनुसार, यही फर्क AAP और बीजेपी की कार्यशैली में दिखाई देता है. AAP अपने लोगों पर भी कार्रवाई करती है, जबकि बीजेपी अपने लोगों को बचाने में लग जाती है.

रंधावा सुसाइड और ‘12 सेकंड' का वीडियो

दरअसल, अमृतसर में पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने 21 मार्च, 2026 को घर पर सल्फास खाकर जान दे दी. मरने से पहले उन्होंने 12 सेकंड का वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने कहा कि “तुम्हारे दोस्त ने मिनिस्टर लालजीत भुल्लर के डर से सल्फास खा लिया है, अब मैं बच नहीं सकता.” वीडियो सामने आते ही मामला तेज़ी से तूल पकड़ गया.

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क्या है पूरा मामला? 

रंधावा के परिवार और यूनियन नेताओं का आरोप है कि वेयरहाउस के टेंडर पास कराने को लेकर ये विवाद था. कहा गया कि पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर रंधावा पर अपने पिता के नाम पर ऐसे टेंडर मंज़ूर कराने का दबाव बना रहे थे, जो टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स पर खरे नहीं उतरते थे. दावा है कि 13 मार्च को रंधावा को मंत्री के घर बुलाया गया, वहां मारपीट हुई और बंदूक की नोक पर उनसे 10 लाख रुपये रिश्वत लेने का झूठा ‘कबूलनामा' वीडियो बनवाया गया. परिवार इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत लिया इस्तीफा  

वीडियो वायरल होते ही पंजाब में हंगामा मच गया. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत इस्तीफा लेकर मामला चीफ सेक्रेटरी K.A.P. सिन्हा को जांच के लिए सौंप दिया. इसके कुछ घंटे बाद अमृतसर पुलिस ने लालजीत भुल्लर और उनके पिता सुखदेव सिंह भुल्लर के खिलाफ IPC की धारा 109, 351(3), 3(5) के तहत FIR दर्ज कर ली. सरकार का कहना है कि जांच बिना पक्षपात आगे बढ़ेगी.

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‘राजनीतिक दबाव पर लगाम लगे'

विपक्षी दलों ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया और सीएम आवास का घेराव कर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई. विपक्ष का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव और डराने‑धमकाने की प्रवृत्ति पर अब कड़ाई से रोक जरूरी है, ताकि सिस्टम में भरोसा कायम रहे.

पुराने विवाद फिर सुर्खियों में

मामले के बाद AAP के कुछ नेताओं से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा में आ गए...

  • डॉ. विजय सिंगला (पूर्व हेल्थ मंत्री): कॉन्ट्रैक्ट में कमीशन मांगने के आरोप में बर्खास्त कर जेल भेजा गया.
  • फौजा सिंह सरारी (पूर्व कैबिनेट मंत्री): जबरन वसूली से जुड़ी ऑडियो क्लिप वायरल होने पर जनवरी 2023 में इस्तीफा.
  • लाल चंद कटारूचक (कैबिनेट मंत्री): यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप—पीड़ित ने बाद में इनकार किया, पर विवाद बढ़ा.
  • अमित रतन कोटफट्टा (MLA): विजिलेंस ने रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया.
  • इसके अलावा अनमोल गगन मान, नरिंदर कौर भारज पर भ्रष्टाचार के आरोप चर्चा में रहे. रामपुरा से MLA फूल बलकार सिद्धू भी विवादों में रहे. बलकार सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा, मई 2024 में कैबिनेट से बाहर हुए. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा (AAP MLA) को ED ने सितंबर 2024 में बैंक फ्रॉड केस में गिरफ्तार किया था.

परिवार की मांग और आगे की राह

रंधावा का परिवार निष्पक्ष और तेज जांच, आरोपियों की कानूनी जवाबदेही, और अधिकारियों की सुरक्षा के स्पष्ट नियमों की मांग कर रहा है. यूनियन चाहती हैं कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और टेक्निकल मानकों के अनुसार चले, ताकि भविष्य में किसी अधिकारी पर दबाव न बनाया जा सके. 

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