देश के कई राज्यों में मतदाता सूचियों में अनियमितताओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को घोषणा की कि आम आदमी पार्टी (आप) विशेष गहन संशोधन (एस.आई.आर.) प्रक्रिया के तहत पंजाब में किसी भी योग्य मतदाता का वोट नहीं हटाने देगी. किसी विशेष राजनीतिक पार्टी के लिए "फर्जी वोट" बनाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी देते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आप नेता और कार्यकर्ता प्रदेश भर के प्रत्येक पोलिंग बूथ पर बूथ लेवल अफसरों (बी.एल.ओज़.) के साथ तैनात रहेंगे, ताकि इस प्रक्रिया की कड़ी निगरानी की जा सके और अनियमितताओं को रोका जा सके.
मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "मतदाता सूचियों का विशेष गहन संशोधन पूरी पारदर्शिता, ईमानदारी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ किया जाना चाहिए, ताकि हर योग्य मतदाता बिना किसी डर या निर्विघ्न ढंग से अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सके. पूरी प्रक्रिया के दौरान सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि सक्रिय रूप से शामिल होंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पंजाब में कहीं भी कोई हेराफेरी न हो."
मुख्यमंत्री ने कहा, "विभिन्न राज्यों में योग्य वोटों को हटाने और फर्जी एंट्री करने बारे पैदा हुए खतरों के कारण नागरिकों के बीच चिंता पैदा हो गई है, जिसके कारण चुनाव आयोग के लिए पूरी जिम्मेदारी और निष्पक्षता के साथ काम करना अनिवार्य हो गया है. लाखों योग्य वोटों को हटाने और सत्यापन प्रक्रिया में हेराफेरी बारे विभिन्न राज्यों से शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन पंजाब के लोग राज्य में ऐसे कृत्यों की इजाजत नहीं देंगे."
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "अगर मतदाता सूचियों की सटीकता और चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास कम होने लगे, तो लोकतंत्र की नींव खतरे में पड़ सकती है." उन्होंने आगे कहा, "चुनाव आयोग को हर योग्य मतदाता की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई आपत्तियों का पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और बिना किसी देरी के समाधान करना चाहिए."
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि पंजाब में लगभग 83 प्रतिशत मतदाता मैपिंग पहले ही पूरी हो चुकी है. उन्होंने नागरिकों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सत्यापन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने की अपील की. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पुष्टि की, "चुनाव आयोग को सम्पूर्ण एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए और लोगों द्वारा उठाई गई आपत्तियों का तुरंत एवं निष्पक्ष ढंग से निपटारा करना चाहिए."
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